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दो महीने बेचने के बाद अब खरीदार बने विदेशी निवेशक, दिसंबर में कर डाले इतने हजार करोड़ निवेश

 Edited By: Alok Kumar
 Published : Dec 15, 2024 01:43 pm IST,  Updated : Dec 15, 2024 01:43 pm IST

निवेशकों में उम्मीद बनी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में कटौती करेगा। वहीं, खुदरा महंगाई अक्टूबर के 6.21% से घटकर नवंबर में 5.48 प्रतिशत रह गई है। इससे बाजार को बल मिलेगा।

FPI- India TV Hindi
विदेशी निवेशक Image Source : FILE

विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं।  अक्टूबर और नवंबर में भारी बिकवाली के बाद अब दिसंबर में विदेशी निवेशकों ने पैसा लगाना शुरू कर दिया है। दिसंबर के पहले दो सप्ताह में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 22,766 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पहले नवंबर में एफपीआई ने भारतीय बाजार से 21,612 करोड़ रुपये और अक्टूबर में 94,017 करोड़ रुपये की भारी निकासी की थी। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय बाजार में वापसी की है। इससे बाजार में रिकवरी लौटी है। 

अक्टूबर की निकासी का आंकड़ा सबसे खराब था

अक्टूबर की निकासी का आंकड़ा सबसे खराब रहा था। दिलचस्प तथ्य यह है कि सितंबर में एफपीआई का प्रवाह के लिए नौ माह के उच्चस्तर 57,724 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। यह विदेशी निवेशकों के निवेश के रुख में अस्थिरता को दर्शाता है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, ताजा प्रवाह के साथ 2024 में अबतक शेयरों में एफपीआई का निवेश 7,747 करोड़ रुपये रहा है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के एसोसिएट निदेशक, प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि आगे चलकर भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेशकों का प्रवाह कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगा। इनमें डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा राष्ट्रपति के रूप में लागू की गई नीतियां, मौजूदा मुद्रास्फीति और ब्याज दर की स्थिति और भू-राजनीतिक परिदृश्य शामिल है।

CRR घटने से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ी 

उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारतीय कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे और आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर देश की प्रगति भी निवेशक धारणा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने इस महीने अबतक (13 दिसंबर तक) शेयरों में शुद्ध रूप से 22,766 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसकी वजह यह है कि माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दर में कटौती करेगा। वॉटरफील्ड एडवाइजर्स के वरिष्ठ निदेशक (सूचीबद्ध निवेश) विपुल भोवर ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को कम करके तरलता बढ़ाई है, जिससे निवेशकों की धारणा को बल मिला है। 

महंगाई में भी गिरावट से सेंटीमेंट सुधरा 

इसके अलावा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर के 6.21 प्रतिशत से घटकर नवंबर में 5.48 प्रतिशत रह गई है। इससे निवेशकों में उम्मीद बनी है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में कटौती करेगा। समीक्षाधीन अवधि में एफपीआई ने बॉन्ड में सामान्य सीमा के तहत 4,814 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वहीं उन्होंने स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) से 666 करोड़ रुपये की निकासी की है। इस साल अबतक एफपीआई ऋण या बॉन्ड बाजार में 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं। 

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