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वित्त मंत्रालय से इंडस्ट्री की टेलीफोन उपकरणों, पीसीबीए पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी वापस लेने की मांग

इंडस्ट्री ने अनुमान  दिया है कि मेक-इन-इंडिया शुल्क में बढ़ोतरी से उत्पादों की लागत 5-6 प्रतिशत बढ़ जाएगी क्योंकि कई उपकरणों को आयात किया जाता है  

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: April 19, 2021 19:28 IST
टेलीकॉम सेक्टर की...- India TV Paisa
Photo:PTI

टेलीकॉम सेक्टर की उपकरणों पर आयात शुल्क बढ़ोतरी वापस लेने की मांग

नई दिल्ली। उद्योग निकाय ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने दूरसंचार विभाग और वित्त मंत्रालय से दूरसंचार कल पुर्जो और पीसीबीए पर हालिया बजट में आयात शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लेने की मांग की है। बीआईएफ का कहना है कि इस पहल से दूरसंचार उत्पादों को बनाने की लागत बढ़ेगी और इससे पीएलआई योजना के तहत मिलने वाले लाभ निष्प्रभावी हो जायेंगे। बीआईएफ ने सरकार से उक्त शुल्कों को वापस लेने का आग्रह किया है और दूरसंचार कल पुर्जो पर शुल्क में छूट जारी रखने पर जोर दिया है। बीआईएफ के अध्यक्ष, टी वी रामचन्द्रन ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘वर्ष 2017 से विभिन्न मदों को कवर करते हुए सीमा शुल्क अधिसूचना के तहत कुछ छूट दी गई थी। लेकिन एक फरवरी को विभिन्न कलपुर्जों पर सीमा शुल्क संबंधी कुछ छूट वापस ले ली गई। इस वजह से, अनुमान है कि मेक-इन-इंडिया उत्पादों की लागत 5-6 प्रतिशत बढ़ जाएगी क्योंकि कई उपकरणों को आयात किया जाता है और  वे यहां नहीं बनाए जाते।” 

वित्त सचिव को लिखे हालिया पत्र में, बीआईएफ ने चिंता व्यक्त की है कि अधिसूचना के कारण टेलिफोन कल पुर्जो के शुल्क में वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीआईएफ ने सरकार को बताया, ‘‘इससे संभवत: 24 फरवरी 2021 को दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा घोषित उत्कृष्ट पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना के लाभों को पूरी तरह से निष्प्रभावी कर सकता है।’’ आयात शुल्क के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए, बीआईएफ ने दावा किया, ‘‘यह आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत ‘मेक-इन-इंडिया’ के लिए सरकार के प्रयासों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) देशों में आयात किए गए समकक्ष उत्पादों की तुलना में भारत में बनाए गए दूरसंचार उत्पादों को गैर-प्रतिस्पर्धी बना देगा।’’ 

 

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