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Crude Oil price: 18 साल के निचले स्तर से कच्चे तेल में रिकवरी, लेकिन भाव 25 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी उठापटक देखने को मिल रही है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चा तेल यानी WTI क्रूड का भाव घटकर 20 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया था जो लगभग 18 साल में सबसे कम भाव है।

Written by: India TV Business Desk
Published : Mar 20, 2020 08:56 am IST, Updated : Mar 20, 2020 08:57 am IST
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Crude Oil Price 

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में भारी उठापटक देखने को मिल रही है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चा तेल यानी WTI क्रूड का भाव घटकर 20 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया था जो लगभग 18 साल में सबसे कम भाव है। हालांकि, आज निचले स्तर पर कच्चे तेल में खरीदारी लौटी है और भाव रिकवर होकर 25 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। 

कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की मांग में भारी कमी की आशंका है, जिस वजह से भाव निचले स्तर पर आ गए हैं। लंबी अवधि में कच्चे तेल के घटे हुए भाव का फायदा भारतीय ग्राहकों को मिल सकता है। हालांकि, जिस तरह से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है उसके कारण कच्चा तेल आयात करने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। और तुरंत ग्राहकों को सस्ते कच्चे तेल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

कोराना वायरस के चलते विश्वस्तर पर उथल पुथल और आर्थिक मंदी के गंभीर खतरे के बीच अमेरिकी डालर के समक्ष रुपये की विनिमय दर बृहस्पतिवार को 86 पैसे या 1.16 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ प्रति डालर 75.12 के अभूतपूर्व न्यूनतम स्तर पर आ गयी। अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डालर की मजबूती तथा कच्चे तेल के बार में उछाल से रुपये पर दबाव था। इस महीने डालर के मुकाबले रुपया करीब चार प्रतिशत हल्का हो चुका है।

विदेशी निवेशक भारतीय प्रतिभूति बाजार से मार्च में करीब एक लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। व्यापारियों का कहना है कि कोराना विषाणु से फैली वैश्विक महामारी के चलते घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगातार गहरे संकट में घिरने से निवेशकों की चिंता बढ़ती जा रही है। इस महामारी से अब तक दुनिया में 9000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

भारत का ऐसे होगा फायदा

विश्लेषकों के मुताबिक कमजोर मांग के चलते कारोबारियों के सौदे काटने के चलते कच्चे तेल के वायदा में गिरावट देखी जा रही है। दो बड़े तेल उत्पादक देशों सऊदी अरब और रूस के इस झगड़े से भारत के लिए स्वर्णिम मौका आया है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 83 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। वित्त वर्ष 2018-19 में 112 अरब डॉलर का कच्चा तेल भारत ने आयात किया है। चालू वर्ष में जनवरी तक ही 87.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल भारत खरीद चुका है। 

केयर रेटिंग के अनुसार कच्चे तेल के दाम में एक डॉलर की गिरावट से भारत के आयात बिल में 10,700 करोड़ की गिरावट आती है। यानी 30 डॉलर गिरावट का अर्थ सरकार के लिए तीन लाख करोड़ रुपए की बचत है। एक और रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार तेल के दाम में 10 डॉलर की गिरावट से भारत की महंगाई की दर में करीब एक फीसद की गिरावट संभव है।

कच्चा तेल सस्ता होने का मतलब यह भी है कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल सस्ता होना। हर फैक्ट्री में आने और वहां से निकलने वाला माल जिन ट्रकों पर ढोया जाता है, उनका किराया भी डीजल के दाम से ही तय होता है।

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