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इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की योजना के तहत 8,730 करोड़ का वित्तीय समर्थन दे सकती है सरकार

Edited by: Manish Mishra Published : Mar 26, 2018 07:28 pm IST, Updated : Mar 26, 2018 07:28 pm IST

सरकार पांच साल की योजना एफएएमई इंडिया (FAME India) के दूसरे चरण के लिए 8,730 करोड़ रुपए की वित्तीय समर्थन दे सकती है।

Electric Vehicles- India TV Paisa

Electric Vehicles

नई दिल्ली सरकार पांच साल की योजना एफएएमई इंडिया (FAME India) के दूसरे चरण के लिए 8,730 करोड़ रुपए की वित्तीय समर्थन दे सकती है। लेकिन प्रोत्साहन सार्वजनिक परिवहन, वाणिज्यिक उद्देश्य से उपयोग होने वाले नए ऊर्जा वाहनों तथा उच्च गति के दोपहिया वाहनों के लिये सीमित होगा। भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने प्रौद्योगिकी आधारित रुख अपनाने का फैसला किया है और फेम (फास्टर एडाप्शन एंड मैन्‍युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया) योजना के दूसरे चरण में केवल आधुनिक बैटरी को बढ़ावा दिया जाएगा।

अधिकारी के अनुसार, योजना का दूसरा चरण 1 अप्रैल से क्रियान्वित होना था लेकिन इसमें देरी हो सकती है। इसमें 8,730 करोड़ रुपए का व्यय प्रस्तावित है और इसे जल्दी ही मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जा सकता है।

कोष समर्थन में 2,500 करोड़ रुपए बसों, 1,000 करोड़ रुपए चारपहिया वाहनों तथा 600 करोड़ रुपए उच्च गति वाले दोपहिया वाहनों के लिये है। इसके अलावा 750 करोड़ रुपए उच्च गति के तिपहिया वाहनों के लिए है। दूसरे चरण की प्रस्तावित योजना को हाल ही में नीति आयोग को सौंपा गया। आयोग इस बारे में बिजली और सड़क, परिवहन तथा राजमार्ग समेत संबद्ध मंत्रालयों की राय लेने की प्रक्रिया में है।

अधिकारी ने कहा कि योजना का पहला चरण या पायलट योजना 31 मार्च को समाप्त होने वाली है और इसे कुछ और महीने बढ़ाया जा सकता है।

एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि फेम दो के के अंतर्गत योजना विस्तार विशेष रूप से सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक परिवहन के लिए होगा। हालांकि, दोपहिया खंड में 25 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक गति वाले वाहनों को सहयोग जारी रहेगा।

प्रस्ताव में ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और उसमें स्थानीय उपकरणों के उपयोग के बीच प्रोत्साहन को जोड़ने की भी बात कही गई है। उसने कहा कि यह प्रस्ताव है कि स्थानीय स्तर पर बने उपकरणों के उपयोग को बढ़ाया जाए। इसके लिए पहले साल 50 प्रतिशत, दूसरे साल 60 प्रतिशत तथा उसके बाद 70 प्रतिशत उपयोग का प्रस्ताव है।

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