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Loan moratorium अवधि में ब्‍याज में छूट पर जल्‍द होगा निर्णय, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दिया आश्‍वासन

लोन मोराटोरियम के दौरान स्थगित ईएमआई पर ब्याज पर ब्याज में छूट को लेकर निर्णय लेने की प्रक्रिया एडवांस स्टेज में है और दो या तीन दिनों के भीतर फैसला आ सकता है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Sep 28, 2020 01:39 pm IST, Updated : Sep 28, 2020 01:39 pm IST
loan moratorium: Decision in 2-3 days over interest on deferred instalments by banks, Centre tells S- India TV Paisa
Photo:FILE PHOTO

loan moratorium: Decision in 2-3 days over interest on deferred instalments by banks, Centre tells SC

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से उपभोक्‍ताओं को लोन मोराटोरियम के दौरान स्थगित ईएमआई पर ब्याज पर ब्याज में छूट को लेकर निर्णय लेने की प्रक्रिया एडवांस स्टेज में है और दो या तीन दिनों के भीतर फैसला आ सकता है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया है कि मुद्दे सरकार द्वारा सक्रिय रूप से विचाराधीन हैं और दो या तीन दिनों के भीतर निर्णय लिए जाने की संभावना है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने लोन मोराटोरियम की अवधि को 5 अक्‍टूबर तक बढ़ा दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अब अगली सुनवाई भी 5 अक्‍टूबर को ही करेगा।

सरकार की ओर से तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत के समक्ष कहा कि वह गुरुवार तक हलफनामा सर्कुलेट करने का प्रयास करेंगे और मामले की सुनवाई सोमवार को हो सकती है। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई तक अंतरिम आदेश जारी रहेगा। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता ने पीठ के समक्ष दलील दी कि इस मामले को जल्द से जल्द सुना जाए और मामले में हलफनामा दायर करने के लिए केंद्र की ओर से समय मांगने पर आपत्ति नहीं जताई।

मेहता ने इस मामले पर वापस आने के लिए कुछ और समय मांगते हुए कहा कि यह मुद्दा थोड़ा जटिल है और कई आर्थिक मुद्दे सामने आए हैं। सुनवाई की पिछली तिथि पर केंद्र ने पीठ को सूचित किया था कि उच्चतम स्तर पर गठित एक विशेषज्ञ समिति द्वारा मोराटोरियम के विस्तार, मोराटोरियम के दौरान ब्याज, ब्याज पर ब्याज और मामले से संबंधित अन्य मुद्दों पर निर्णय लेने की संभावना है। 

केंद्र सरकार ने कहा की वह इस मामले में आरबीआई के साथ से बातचीत कर रही है और बहुत जल्द कोई समाधान निकलेगा। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए थोड़ा समय दिया जाए। लोन मोराटोरियम पीरियड पहले 31 अगस्त को खत्म हो रहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान उसे 28 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया था, क्योंकि अगली सुनवाई आज ही होनी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को करने वाला है तो तब तक लोन मोराटोरियम तब तक जारी रहेगा। आरबीआई ने मार्च में लोन मोराटोरियम 3 महीने के लिए शुरू किया था, जिसे बाद में और तीन महीने के लिए बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया था।

इससे पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोन मोराटोरियम पीरियड 2 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इस पर एक्सपर्ट कमेटी भी अपनी रिपोर्ट दे चुकी है। 10 सितंबर को तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा था कि ब्याज पर छूट नहीं दे सकते हैं, लेकिन भुगतान का दबाव कम कर देंगे। मेहता ने कहा था कि बैंकिंग क्षेत्र अर्थव्यवस्था की रीढ है और अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

दरअसल, इस लोन मोराटोरियम में व्यवस्था है कि जो लोग कोरोना महामारी में अपनी ईएमआई नहीं दे सकते हैं, उनके पास आगे के लिए अपनी ईएमआई स्थगित करने का विकल्प होगा। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसका कोई फायदा आम लोगों को नहीं मिल रहा है, क्योंकि जो अपने ईएमआई स्थगित कर रहे हैं तो उन्हें इस स्थगन की अवधि का पूरा ब्याज देना पड़ रहा है।

 

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