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एशिया-प्रशांत राष्ट्रों में सबसे कम मूल वेतन भारत में: रिपोर्ट

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Jun 07, 2016 09:18 pm IST,  Updated : Jun 07, 2016 09:18 pm IST

एक सर्वेक्षण के मुताबिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में हर स्तर पर सबसे कम वार्षिक मूल वेतन भारत में मिलता है।

एशिया-प्रशांत देशों में सबसे कम मूल वेतन भारत में, चीन में मिलता है 64-100 फीसदी ज्‍यादा वेतन- India TV Hindi
एशिया-प्रशांत देशों में सबसे कम मूल वेतन भारत में, चीन में मिलता है 64-100 फीसदी ज्‍यादा वेतन

नई दिल्ली। एक सर्वेक्षण के मुताबिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में हर स्तर पर सबसे कम वार्षिक मूल वेतन भारत में मिलता है। विलिस टावर्स वाटसन ने कहा, चीन में हर स्तर की नौकरियों पर भारत से 64-100 फीसदी ज्यादा तक मूल वेतन दिया जाता है।

इसमें कहा गया है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत में सबसे कम वार्षिक मूल वेतन दिया जाता है और चीन के मुकाबले यह उल्लेखनीय रूप से कम है। यह सर्वेक्षण एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 5,500 कंपनियों पर किया गया है जिसमें भारत की करीब 313 फर्म शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2016-17 में उत्पाद वृद्धि में सुधार की संभावना: RBI सर्वे

कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में सुधार से सकल मूल्य वद्र्धन (जीवीए) के आधार पर भारत की वास्तविक अर्थव्यवस्था 2016-17 में 7.6 फीसदी की दर से वृद्धि कर सकती है। रिजर्व बैंक प्रायोजित पेशेवर अनुमान लगाने वालों ने यह भविष्यवाणी की है। वृहत आर्थिक संकेतकों पर सर्व जारी करते हुए रिजर्व बैंक ने कहा, मूल कीमत पर जीवीए के उपयोग के आधार पर उत्पादन वृद्धि में 2016-17 और उसके बाद 2017-18 में भी सुधार होने की संभावना है। अगली पांच तिमाहियों के लिए अनुमान यह संकेत देता है कि वृद्धि में सुधार की उम्मीद है।

40वें दौर के सर्वे में अनुमानकर्ताओं को उम्मीद है कि वास्तविक जीवीए 2016-17 में 7.6 फीसदी बढ़ेगा। वित्त वर्ष 2017-18 के संदर्भ में पेशेवरों ने कहा कि सेवा क्षेत्र में 9.2 फीसदी वृद्धि की अगुवाई में वास्तविक जीवीए 7.8 फीसदी बढ़ेगा। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियेां तथा उद्योग में क्रगमश: 2.7 फीसदी तथा 8.0 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। सर्वे में दीर्घकालीन जीवीए वृद्धि 8.3 फीसदी पर बरकरार रखा गया है जबकि मध्यम अवधि में वृद्धि का अनुमान अगले पांच साल के लिए बढ़कर 8.3 फीसदी हो गया है। पिछले दौर में इसके 7.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। निजी अंतिम उपभोग व्यय चालू मूल्य पर 2016-17 में 10.7 फीसदी तथा 2016-17 में 11.9 फीसदी वृद्धि का अनुमान है।

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