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Family Savings: परिवारों की नेट बचत तीन साल में ₹9 लाख करोड़ घटी, सरकार ने जारी किए आंकड़े

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : May 07, 2024 06:44 pm IST,  Updated : May 07, 2024 06:49 pm IST

वित्त वर्ष 2020-21 में परिवारों की शुद्ध बचत 23.29 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आ रही है। परिवारों का बैंक ऋण भी इन तीन वर्षों में दोगुना होकर 2022-23 में 11.88 लाख करोड़ रुपये हो गया।

म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा है।- India TV Hindi
म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा है। Image Source : INDIA TV

परिवारों को बचत कर पाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़े यही दर्शा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में परिवारों की शुद्ध बचत (नेट सेविंग) तीन सालों में 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घटकर वित्त वर्ष 2022-23 में 14.16 लाख करोड़ रुपये रह गई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी है। भाषा की खबर के मुताबिक, मंत्रालय की तरफ से जारी ताजा राष्ट्रीय खाता सांख्यिकी-2024 के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 में परिवारों की शुद्ध बचत 23.29 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट आ रही है।

कितनी रह गई बचत

खबर के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में परिवारों की शुद्ध बचत घटकर 17.12 लाख करोड़ रुपये रह गई। यह वित्त वर्ष 2022-23 में और भी कम होकर 14.16 लाख करोड़ रुपये पर आ गई जो पिछले पांच सालों का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले शुद्ध घरेलू बचत का निचला स्तर वर्ष 2017-18 में 13.05 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन यह 2018-19 में बढ़कर 14.92 लाख करोड़ रुपये और 2019-20 में 15.49 लाख करोड़ रुपये हो गया था।

म्यूचुअल फंड में निवेश

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2020-21 से लेकर 2022-23 के दौरान म्यूचुअल फंड में निवेश लगभग तिगुना होकर 1.79 लाख करोड़ रुपये हो गया जो 2020-21 में 64,084 करोड़ रुपये था। शेयरों और डिबेंचर में परिवारों का निवेश इस अवधि में 1.07 लाख करोड़ रुपये से लगभग दोगुना होकर 2022-23 में 2.06 लाख करोड़ रुपये हो गया।

परिवारों का बैंक ऋण दोगुना

आंकड़े बताते हैं कि परिवारों का बैंक ऋण भी इन तीन वर्षों में दोगुना होकर 2022-23 में 11.88 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह 2020-21 में 6.05 लाख करोड़ रुपये और 2021-22 में 7.69 लाख करोड़ रुपये था। वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तरफ से परिवारों को दिया जाने वाला ऋण भी वित्त वर्ष 2020-21 में 93,723 करोड़ रुपये से चार गुना बढ़कर 2022-23 में 3.33 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2021-22 में यह 1.92 लाख करोड़ था।

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