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US–ईरान युद्ध के कारण संकट में आए फलों-सब्जियों के निर्यातकों को दी गई राहत, ये शुल्क हो गया माफ

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Mar 11, 2026 01:30 pm IST,  Updated : Mar 11, 2026 01:30 pm IST

महाराष्ट्र सरकार और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी की यह पहल निर्यातकों को वित्तीय नुकसान से बचाने में सहायक साबित होगी, जबकि वैकल्पिक रूट्स (जैसे केप ऑफ गुड होप) के माध्यम से जहाजों की उपलब्धता का इंतजार किया जा रहा है।

यह फैसला निर्यातकों और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट समुदाय को बड़ा राहत देगा।- India TV Hindi
यह फैसला निर्यातकों और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट समुदाय को बड़ा राहत देगा। Image Source : FREEPIK

अमेरिका-ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के कारण खाड़ी देशों (गल्फ) की ओर जाने वाले जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है। इससे भारत से फलों और सब्जियों (विशेष रूप से केला, अंगूर, प्याज, तरबूज आदि) के निर्यात पर गंभीर असर पड़ा है। बड़ी संख्या में रीफर (शीतगृह) कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं, जिससे निर्यातकों और किसानों को भारी नुकसान का खतरा है। इस संकट को देखते हुए जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) ने त्वरित राहत उपाय घोषित किए हैं। महाराष्ट्र के मंत्री जयकुमार रावल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने फंसे निर्यात कंटेनरों पर महत्वपूर्ण छूट दी है।

मुख्य राहत उपाय

ग्राउंड रेंट/स्टोरेज/ड्वेल टाइम चार्जेस पर 100% माफी (पूरी तरह छूट)

रीफर (शीतगृह) कंटेनरों के प्लग-इन/बिजली कनेक्शन चार्जेस में 80% छूट
प्रभावित कंटेनरों के लिए बंदरगाह पर अतिरिक्त स्टोरेज सुविधा और स्टैकिंग स्पेस उपलब्ध कराया जाएगा।

राहत की अवधि और पात्रता

यह छूट 28 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि (00:00 घंटे) से 14 मार्च 2026 की मध्यरात्रि (24:00 घंटे) तक, यानी 15 दिनों के लिए लागू रहेगी।
जिन कंटेनरों में यह राहत मिलेगी
-28 फरवरी 2026 से टर्मिनल में मौजूद कंटेनर
- 8 मार्च 2026 सुबह 7 बजे तक गेट-इन हुए कंटेनर

वर्तमान स्थिति

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी में लगभग 250-1000 (विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार) फल-सब्जी से जुड़े कंटेनर फंसे हुए हैं।
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर भी करीब 150 कंटेनर अटके हैं।
कुल मिलाकर भारत में फलों-सब्जियों के लगभग 1000 कंटेनर (बड़े पैमाने पर केला, अंगूर, प्याज आदि) इस संकट से प्रभावित हैं।
प्रमुख शिपिंग लाइंस (Maersk, MSC, CMA CGM आदि) ने मिडिल ईस्ट रूट्स पर सेवाएं निलंबित कर दी हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सूएज मार्ग प्रभावित हुआ है।

किसानों-निर्यातकों के लिए कितना अहम

यह फैसला फल-सब्जी उत्पादक किसानों, निर्यातकों और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट समुदाय को बड़ा राहत देगा, क्योंकि फंसे रीफर कंटेनरों में नाशवान माल सड़ने का खतरा बहुत अधिक था। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने टर्मिनल ऑपरेटर्स को निर्देश दिए हैं कि वे इन छूटों को तुरंत लागू करें और प्रभावित कार्गो को प्राथमिकता दें। 

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