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'मृतक कर्मचारी के कथित असंतोषजनक रिकॉर्ड का इस्तेमाल बेटे की अनुकंपा नियुक्ति की अर्जी खारिज करने के लिए नहीं कर सकते', हाईकोर्ट की टिप्पणी

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 26, 2026 11:29 pm IST,  Updated : Apr 26, 2026 11:32 pm IST

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मृत कर्मचारी के कथित ‘असंतोषजनक रिकॉर्ड’ के आधार पर परिजनों की अनुंकपा नियुक्ति नहीं रोकी जा सकती है। हाईकोर्ट के मुताबिक, अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य फैमिली को सहारा देना होता है।

MP High Court judgment- India TV Hindi
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले पर अहम टिप्पणी की। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

Compassionate Appointment Case: मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में साफ किया कि मृत कर्मचारी के कथित रूप से असंतोषजनक सेवा रिकॉर्ड को उसके परिवार वालों के रोजगार के अधिकार से जोड़कर नहीं देख सकते। हाईकोर्ट के मुताबिक, ऐसा आधार ना तो नियमों में है और ना ही इसे नियुक्ति को खारिज करने का वैलिड कारण माना जा सकता है।

अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिलने पर दी थी चुनौती

लाइव लॉ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जय कुमार पिल्लई की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी उस अर्जी पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक शख्स ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए किए गए आवेदन के 30 जनवरी, 2018 को खारिज होने को चुनौती दी थी। दरअसल, याचिकाकर्ता के पिता Union Bank of India में नियमित कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और 22 साल से ज्यादा वक्त तक बैंक में सेवा देने के बाद अचानक उनका निधन हो गया था।

पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं मनमाने आदेश

हाईकोर्ट ने पाया कि नियुक्ति को अस्वीकार करते वक्त सक्षम प्राधिकारी ने किसी स्पष्ट नीति या नियम का हवाला नहीं दिया। ऑर्डर में सिर्फ ‘असंतोषजनक सेवा रिकॉर्ड’ का उल्लेख हुआ, जो कि अनुकंपा नियुक्ति में कहीं भी अस्वीकृति का बेस नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर इस प्रकार के मनमाने और तर्कहीन आदेश प्रश्न खड़े करते हैं।

फैमिली को आर्थिक संकट से उबारना अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मकसद मृतक कर्मचारी की फैमिली को अचानक पैदा हुए आर्थिक संकट से उबारना होता है। इसलिए इस प्रोसेस में फैमिली की इकोनॉमिक कंडीशन, निर्भरता और आजीविका के साधनों को प्रॉयरिटी दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि ऐसे ऑर्डर पारित नहीं करें, जिनमें नियमों और ठोस आधार का साफ उल्लेख ना हो।

बेंच ने यह फैसला दिया कि 60 दिनों के अंदर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही, अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि वे याचिकाकर्ता को हुई परेशानी के लिए उसे 50 हजार रुपये की राशि हर्जाने के तौर पर अदा करें।

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