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Satellite internet in India : मस्क को छोड़िए.. अंबानी ला रहे हैं भारत में सैटेलाइट इंटरनेट, मिल गई मंजूरी

 Written By: Pawan Jayaswal
 Published : Jun 13, 2024 04:51 pm IST,  Updated : Jun 13, 2024 04:57 pm IST

Satellite internet in India : भारत के सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस मार्केट में अगले पांच वर्षों में सालाना 36% की ग्रोथ होने की उम्मीद है और साल 2030 तक यह 1.9 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

जियो सैटेलाइट इंटरनेट- India TV Hindi
जियो सैटेलाइट इंटरनेट Image Source : REUTERS

रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स और लक्जमबर्ग बेस्ड SES के जॉइंट वेंचर्स को गीगाबाइट फाइबर इंटरनेट प्रदान करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक से सैटेलाइट संचालित करने की मंजूरी मिल गई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। ऑर्बिट कनेक्ट इंडिया को तीन अप्रूवल्स जारी की गई, जिनका लक्ष्य सैटेलाइट बेस्ड हाई-स्पीड इंटरनेट एक्सेस प्रदान करना है। यह अप्रूवल ऐसे समय मिली, जब अमेजन डॉट कॉम से लेकर एलन मस्क की स्टारलिंक तक कई कंपनियां दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में उपग्रह संचार सेवाएं शुरू करने की अनुमति के लिए होड़ कर रही हैं। इस अप्रूवल से ऑर्बिट कनेक्ट को भारत के ऊपर सैटेलाइट्स को संचालित करने की अनुमति मिल जाती है। लेकिन संचालन शुरू करने के लिए देश के दूरसंचार विभाग से आगे की मंजूरी की आवश्यकता है।

इस कंपनी को भी मिली मंजूरी

एक अन्य कंपनी इनमारसैट (Inmarsat), जो हाई-स्पीड सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट प्रोवाइड करने की इच्छा रखती है, को भी भारत के ऊपर सैटेलाइट्स को संचालित करने की मंजूरी मिल गई है। इन-स्पेस के अध्यक्ष पवन गोयनका ने रॉयटर्स को यह बात बतायी है। एलन मस्क की स्टारलिंक और अमेजन डॉट कॉम की कुइपर सहित दो अन्य कंपनियों ने भी आवेदन किया है। यूटेल्सैट के भारती एंटरप्राइजेज समर्थित वनवेब को पिछले साल के आखिर में सभी अप्रूवल्स दे दिए गए थे।

सालाना 36% की ग्रोथ

कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट के अनुसार, भारत के सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस मार्केट में अगले पांच वर्षों में सालाना 36% की ग्रोथ होने की उम्मीद है और साल 2030 तक यह 1.9 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। दुनिया भर में, ग्रामीण इलाकों को अंतरिक्ष-आधारित इंटरनेट के जरिए जोड़ने की दौड़ तेज हो रही है। अमेजन ने अपने कुइपर प्रोजेक्ट में 10 बिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है, जिसकी घोषणा 2019 में की गई थी, उसी साल स्पेसएक्स ने अपने फर्स्ट ऑपरेशनल स्टारलिंक उपग्रहों को तैनात करना शुरू किया था।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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