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भारत की तेज विकास पर अब डेलॉयट की मुहर, कहा- इस रफ्तार से बढ़ेगी GDP

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jan 12, 2024 08:26 pm IST,  Updated : Jan 12, 2024 08:26 pm IST

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत पर है, जो कि भारतीय रिज़र्व बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य के हिसाब से अधिक है। लेकिन एक दशक पहले की तुलना में बहुत कम है।

डेलॉयट - India TV Hindi
डेलॉयट Image Source : PTI
भारत की तेज विकास पर अब डेलॉयट ने अपनी मुहर लगा दी है। डेलॉयट ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ चालू वित्त वर्ष (2023-24) में 6.9-7.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। वित्तीय परामर्श और ऑडिट सेवा देने वाली कंपनी ने अपनी तिमाही रिपोर्ट में यह कहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2023-24 में 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो एक साल पहले 7.2 प्रतिशत थी। चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर अनुमान बढ़ने का मुख्य कारण खनन और उत्खनन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के कुछ खंडों का अच्छा प्रदर्शन है। 
 

​आयात करने के लिए प्रर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार

डेलॉयट इंडिया की हालिया आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में एक अंतर्निहित गति बन रही है। इसे आर्थिक बुनियाद में सुधार के रूप में देखा जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद का 1.9 प्रतिशत रहा और 2023-24 में इसके और कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार 568 अरब रुपये के अच्छे स्तर पर बना हुआ है, जो 10 महीने से अधिक के आयात जरूरतों को पूरा कर सकता है। 
 

महंगाई पहले के मुकाबले काफी कम 

 
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत पर है, जो कि भारतीय रिज़र्व बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य के हिसाब से अधिक है। लेकिन एक दशक पहले की तुलना में बहुत कम है। डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा, “आर्थिक बुनियाद में सुधार ने हमारी धारणा को मजबूत किया है और हमें उम्मीद है कि हमारे आधारभूत परिदृश्य में भारत की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2023-24 में 6.9 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 6.4 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत के बीच रहेगी।” उन्होंने कहा, ".वैश्विक आर्थिक परिदृश्य मध्यम बना हुआ है। ऐसे में यह भारतीय अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। इससे देश बाकी दुनिया की तुलना में अनिश्चितताओं से बेहतर तरीके से निपट सकेगा।"
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