1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. RBI Monetary Policy: होम और कार लोन की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, रिजर्व बैंक ने महंगाई को लेकर दी ये चेतावनी

RBI Monetary Policy: होम और कार लोन की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, रिजर्व बैंक ने महंगाई को लेकर दी ये चेतावनी

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Feb 10, 2022 10:12 am IST,  Updated : Dec 19, 2022 12:54 pm IST

आरबीआई ने लगातार 10वीं बार प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 4 फीसदी पर, रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर स्थिर है।

RBI Policy- India TV Hindi
RBI Policy

Highlights

  • रिजर्व बैंक ने इस साल की अपनी पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा कर दी है
  • रिजर्व बैंक ने लगातार 10वीं बार रेपा रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया
  • महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक गवर्नर ने जताई चिंता, 2022 के लिए 5.3 प्रतिशत महंगाई का अनुमान

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI-Reserve Bank of India) ने गुरुवार को आर्थिक नीति की घोषणा कर दी है। आरबीआई ने लगातार 10वीं बार प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4% रहेगा। एमएसएफ रेट और बैंक रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4.25% रहेगा। रिवर्स रेपो रेट भी बिना किसी बदलाव के साथ 3.35% रहेगा। हालांकि आरबीआई गवर्नर ने महंगाई को लेकर चिंता जरूर व्यक्त की। रिजर्व बैंक गर्वनर ने कहा कि मार्च तक महंगाई लोगों को सताती रहेगी। इसके बाद कीमतों में गिरावट आ सकती है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022 के लिए 5.3 प्रतिशत महंगाई का अनुमान, वहीं 2023 में 5 प्रतिशत महंगाई का अनुमान लगाया गया है। 

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले अलग रास्ते पर चल रहा है। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में साल-दर-साल सबसे तेज गति से बढ़ने की ओर अग्रसर है। यह रिकवरी बड़े पैमाने पर टीकाकरण और निरंतर वित्तीय और मौद्रिक सहायता के चलते प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8% अनुमानित है। 

बता दें कि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक पहले बैठक सोमवार को शुरू होनी थी, लेकिन स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए महाराष्ट्र द्वारा सात फरवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने पर इसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया। 

इस साल के अंत तक घटेगी महंगाई 

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.8 फीसदी है। वित्त वर्ष 22 में महंगाई दर 5.3 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि चौथी तिमाही में 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में 4.9 फीसदी और वित्त वर्ष 23 की दूसरी तिमाही में 5 फीसदी, तीसरी तिमाही में 4 फीसदी और चौथी तिमाही में महंगाई दर 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है।

10 बार से स्थिर हैं दरें 

यदि रिजर्व बैंक बृहस्पतिवार को नीतिगत दर में यथास्थिति बनाए रखता है, तो यह लगातार दसवीं बार होगा, जब दर अपरिवर्तित रहेगी। केंद्रीय बैंक ने पिछली बार 22 मई, 2020 को ब्याज दरों में कटौती कर नीतिगत दर को संशोधित किया था। 

रेपो रेट (Repo Rate)

रेपो रेट को आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है। बैंक हमें कर्ज देते हैं और उस कर्ज पर हमें ब्याज देना पड़ता है। ठीक वैसे ही बैंकों को भी अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए भारी-भरकम रकम की जरूरत पड़ जाती है और वे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कर्ज लेते हैं। इस ऋण पर रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं।

रेपो रेट से आम आदमी पर क्या पड़ता है प्रभाव

जब बैंकों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा यानी रेपो रेट कम होगा तो वो भी अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। और यदि रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाएगा तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और वे अपने ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा कर देंगे।

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate)

यह रेपो रेट से उलट होता है। बैंकों के पास जब दिन-भर के कामकाज के बाद बड़ी रकम बची रह जाती है, तो उस रकम को रिजर्व बैंक में रख देते हैं। इस रकम पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। रिजर्व बैंक इस रकम पर जिस दर से ब्याज देता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।

रिवर्स रेपो रेट का आम आदमी पर ऐसे पड़ता है प्रभाव

जब भी बाजारों में बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें। इस तरह बैंकों के कब्जे में बाजार में छोड़ने के लिए कम रकम रह जाएगी।

जानिए क्या होता है नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio/CRR)

बैंकिंग नियमों के तहत हर बैंक को अपने कुल कैश रिजर्व का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना ही होता है, जिसे कैश रिजर्व रेश्यो अथवा नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) कहा जाता है। यह नियम इसलिए बनाए गए हैं, ताकि यदि किसी भी वक्त किसी भी बैंक में बहुत बड़ी तादाद में जमाकर्ताओं को रकम निकालने की जरूरत पड़े तो बैंक पैसा चुकाने से मना न कर सके। 

आम आदमी पर सीआरआर का ऐसे पड़ता है प्रभाव

अगर सीआरआर बढ़ता है तो बैंकों को ज्यादा बड़ा हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होगा और उनके पास कर्ज के रूप में देने के लिए कम रकम रह जाएगी। यानी आम आदमी को कर्ज देने के लिए बैंकों के पास पैसा कम होगा।  अगर रिजर्व बैंक सीआरआर को घटाता है तो बाजार नकदी का प्रवाह बढ़ जाता है।

क्या है एसएलआर (Statutory liquidity ratio/वैधानिक तरलता अनुपात)

जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे एसएलआर कहते हैं। नकदी को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है, जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा