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सेबी तीन कंपनियों की संपत्तियों की 10 नवंबर को करेगा नीलामी, जानिए क्या है मामला

 Published : Oct 08, 2022 05:38 pm IST,  Updated : Oct 08, 2022 05:39 pm IST

इन 10 संपत्तियों में से पांच सुमंगल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की, तीन इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की हैं और शेष जीएसएचपी रियलटेक लिमिटेड की हैं।

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sebi Image Source : FILE

Highlights

  • सुमंगल इंडस्ट्रीज, जीएसएचपी रियलटेक और इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की संपत्तियों की 10 नवबंर को नीलामी
  • इन कंपनियों की कुल 10 संपत्तियों की 7.68 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर नीलामी की जाएगी
  • इन 10 संपत्तियों में से पांच सुमंगल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की, तीन इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की हैं

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) निवेशकों से गैरकानूनी तरीके से जुटाए गए धन की वसूली के लिए तीन कंपनियों- सुमंगल इंडस्ट्रीज, जीएसएचपी रियलटेक और इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की संपत्तियों की 10 नवबंर को नीलामी करेगा। सेबी ने शुक्रवार को जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा कि इन कंपनियों की कुल 10 संपत्तियों की 7.68 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर नीलामी की जाएगी। इन 10 संपत्तियों में से पांच सुमंगल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की, तीन इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की हैं और शेष जीएसएचपी रियलटेक लिमिटेड की हैं। इनमें भूमि, कई मंजिला इमारतें और पश्चिम बंगाल में स्थित एक फ्लैट शामिल हैं।

बाजार नियामक सेबी ने तीन कंपनियों और उनके प्रवर्तकों एवं निदेशकों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई में संपत्तियों की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित करते हुए कहा कि यह ऑनलाइन नीलामी 10 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक की जाएगी। सेबी की एक जांच में पाया गया कि जीएसएचपी रियलटेक ने 2012-13 में 535 व्यक्तियों से गैर-परिवर्तनीय रिडीमेबल डिबेंचर (एनसीडी) जारी करके नियामक मानदंडों का पालन किए बिना पैसा जुटाया था। जबकि इन्फोकेयर इंफ्रा ने 90 निवेशकों को गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर आवंटित करके 98.35 लाख रुपये जुटाए थे।

साथ ही, सुमंगल इंडस्ट्रीज ने अवैध सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) के माध्यम से निवेशकों से 85 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। फर्म अवैध 'आलू खरीद' निवेश योजनाएं चला रही थी, जिसमें निवेशकों को केवल 15 महीनों में 100 प्रतिशत तक लाभ का वादा किया गया था। सेबी ने 2013 और 2016 में क्रमशः सुमंगल और जीएसएचपी रियलटेक, इंफोकेयर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ उनके प्रवर्तकों और निदेशकों को निवेशकों से जुटाए गए धन को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि, संस्थाएं निवेशकों के पैसे वापस करने में विफल रहीं जिसके बाद नियामक ने उनके खिलाफ वसूली की कार्यवाही शुरू की। 

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