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  5. 7 साल में पीएम जनधन योजना खातों की संख्‍या बढ़कर हुई 44 करोड़, संसाधनों का हो रहा है सही उपयोग

7 साल में पीएम जनधन योजना खातों की संख्‍या बढ़कर हुई 44 करोड़, संसाधनों का हो रहा है सही उपयोग

जेएएम जो बैंक खातों को आधार और मोबाइल नंबर के साथ जोड़ती है, ने भी सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों को लक्षित बनाने और लोगों के सही वर्ग तक मदद पहुंचाने में मदद की है।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: October 29, 2021 16:46 IST
PM Jan Dhan Yojna accounts swell to 44 crore till Oct this yr- India TV Hindi News
Photo:PTI

PM Jan Dhan Yojna accounts swell to 44 crore till Oct this yr

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत अक्टूबर 2021 तक सात साल में बैंक खातों की संख्या बढ़कर 44 करोड़ हो गई है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2014 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में इस योजना की घोषणा की थी। वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए 28 अगस्त, 2014 को इसे शुरू किया गया था। यह राष्ट्रीय मिशन यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था कि लोगों के पास बैंक, पैसा भेजने की सुविधा, ऋण, बीमा, पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं तक आसानी से पहुंच हो।

आर्थिक मामलों के विभाग की आर्थिक सलाहकार मनीषा सेनशर्मा ने उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा कि पीएम जन धन योजना को उसकी शुरुआत के बाद से अपार सफलता मिली है। पीएम जन धन योजना को लागू करने के लिए एक डिजिटल पाइपलाइन को बिछाया गयाहै। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2021 तक, लगभग 44 करोड़ लाभार्थियों को बैंकों से जोड़ा गया है और इस योजना के माध्यम से सरकार आबादी के वंचित वर्ग से उनके बैंक खातों में पैसे जमा कराने में सफल रही है।

उन्‍होंने कहा कि जेएएम जो बैंक खातों को आधार और मोबाइल नंबर के साथ जोड़ती है, ने भी सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों को लक्षित बनाने और लोगों के सही वर्ग तक मदद पहुंचाने में मदद की है।

सेनशर्मा ने कहा कि पहले सरकार द्वारा तमाम लाभकारी योजनाओं का परिचालन किया जा रहा था लेकिन तब इस बात की आशंका बहुत थी कि ये योजनाएं सही लोगों तक पहुंच रहीं या नहीं। लेकिन अब टेक्‍नोलॉजी के उपयोग के माध्‍यम से लाभ अब केवल पात्र और चिन्हित किए गए लाभार्थी तक पहुंच रहे हैं इसलिए इससे संसाधनों की बर्बादी और लीकेज जैसी कोई परेशानी नहीं है।

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