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Corona महामारी से अछूता रहा कृषि क्षेत्र, 1104 लाख हेक्टेयर में हुई इस बार खरीफ फसलों की बुवाई

कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई के काम पर महामारी का कोई असर नहीं पड़ा है और गर्मियों की फसलों की रिकॉर्ड क्षेत्र में फसल लगाई गई है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: September 12, 2020 10:27 IST
Kharif sowing touches new record at 1,104 lakh hectare- India TV Paisa
Photo:SKYMATE WEATHER

Kharif sowing touches new record at 1,104 lakh hectare

नई दिल्‍ली। जहां एक ओर कोरोना वायरस महामारी से वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था चरमा गई है, वहीं भारतीय कृषि क्षेत्र इससे अछूता है। खरीफ सत्र के लिए दलहन, मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई का काम लगभग समाप्त हो गया है, जबकि धान रुपाई का काम प्रगति पर है। कोविड-19 महामारी के बीच खरीफ फसलों की बुवाई का काम समाप्ति की ओर है। कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई के काम पर महामारी का कोई असर नहीं पड़ा है और गर्मियों की फसलों की रिकॉर्ड क्षेत्र में फसल लगाई गई है। सभी खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा चालू खरीफ सत्र में 5.68 प्रतिशत बढ़कर 1,104.54 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि एक साल पहले के खरीफ मौसम में यह रकबा 1,045.18 लाख हेक्टेयर था।

खरीफ सत्र के लिए अंतिम बुवाई के आंकड़े एक अक्टूबर को जारी किए जाएंगे, लिहाजा तबतक बुवाई के रकबे में और इजाफा हो सकता है। आम तौर पर, खरीफ फसलों की बुवाई जून से दक्षिण पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है और अक्टूबर से इन फसलों की कटाई शुरू होती है। धान खरीफ की मुख्य फसल है। धान बुवाई का काम अभी भी जारी रहने की बात कहते हुए मंत्रालय ने कहा कि अब तक इस फसल की बुवाई का रकबा 7.59 प्रतिशत बढ़कर 402.25 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि एक साल पहले यह रकबा 373.87 लाख हेक्टेयर था।

मंत्रालय ने कहा कि दलहन, मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई लगभग खत्म हो गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दलहन खेती का रकबा पहले के 131.76 लाख हेक्टेयर से 4.64 प्रतिशत बढ़कर 137.87 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि मोटे अनाज का रकबा पहले के 177.43 लाख हेक्टेयर से 1.28 प्रतिशत बढ़कर 179.70 लाख हेक्टेयर हो गया। तिलहन खेती का रकबा 2020 के खरीफ मौसम में अब तक 10.76 प्रतिशत की ऊंची वृद्धि के साथ 195.99 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो एक साल पहले 176.91 लाख हेक्टेयर था।

नकदी फसलों में, गन्ने का रकबा मामूली बढ़त के साथ 52.46 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि इस साल कपास का रकबा 2.12 प्रतिशत बढ़कर 129.30 लाख हेक्टेयर हो गया है। मंत्रालय ने खरीफ बुवाई में रिकॉर्ड प्रगति को श्रेय अच्छी बारिश के अलावा खेती में काम आने वाले बीज, उर्वरक तथा अन्य जरूरी लागतों के साथ ही ऋण की बेहतर उपलब्धता और नवीन प्रौद्योगिकियों को दिया है।

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