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Power Crisis : बिजली संकट पर PMO की नजर, पावर प्लांट में कोयला आपूर्ति की स्थिति पर होगी आज उच्‍चस्‍तरीय बैठक

 Published : Oct 12, 2021 11:08 am IST,  Updated : Oct 12, 2021 01:02 pm IST

गौरतलब है कि ऊर्जामंत्री ने रविवार को देश को आश्वस्त किया था कि पावर प्लांटों की मांग के अनुरूप पर्याप्त कोयला उपलब्ध है और इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

बिजली संकट के बीच अब PMO...- India TV Hindi
बिजली संकट के बीच अब PMO देगा दखल, पावर प्लांट में कोयला आपूर्ति के हालात पर आज होगी उच्चस्तरीय बैठक Image Source : PTI

नई दिल्‍ली। देश में पावर प्लांटों के पास घटते कोयला भंडार के चलते गंभीर बिजली संकट खड़ा हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में जारी कोयला संकट के बीच चार दिन से भी कम के लिए कोयला स्टॉक वाले संयंत्रों की संख्या एक सप्ताह में 64 से बढ़कर 70 हो गई। ये आंकड़े रविवार तक के हैं। इन संयंत्रों में कोयला नहीं पहुंचा तो बिजली उत्पादन कभी भी बंद हो सकता है। संकट की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार भी एक्टिव हो गई है। सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को ऊर्जामंत्री आरके सिंह और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बिजली संकट पर एक घंटे तक चर्चा की। वहीं अब प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस संकट को देखते हुए एक्टिव हो गया है। 

आज बिजली संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय यानि पीएमओ में एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय व कोयला सचिव मंगलवार को मौजूदा हालात से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के समक्ष पेश करेंगे। गौरतलब है कि ऊर्जामंत्री ने रविवार को देश को आश्वस्त किया था कि पावर प्लांटों की मांग के अनुरूप पर्याप्त कोयला उपलब्ध है और इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

70 प्लांटों में चार दिन से कम का भंडार 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कोयले के चार दिन से कम भंडार वाले बिजली संयंत्रों की संख्या रविवार को बढ़कर 70 हो गई, जो एक सप्ताह पहले तीन अक्टूबर को 64 थी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुल 1,65,000 मेगावाट से अधिक स्थापित क्षमता वाले कुल 135 संयंत्रों में 70 संयंत्रों में 10 अक्टूबर 2021 को चार दिन से भी कम का कोयला बचा था। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) इन 135 संयंत्रों की निगरानी करता है।

बढ़ती मांग ने बढ़ाई चिंता

बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक बिजली की खपत आठ अक्टूबर को 390 करोड़ यूनिट थी, जो इस महीने अब तक (1-9 अक्टूबर) सबसे ज्यादा थी। बिजली की मांग में तेजी देश में चल रहे कोयला संकट के बीच चिंता का विषय बन गई है। टाटा पावर की इकाई टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (डीडीएल), जो उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में बिजली वितरण का काम करती है, ने शनिवार को अपने उपभोक्ताओं को फोन पर संदेश भेजकर कोयले की सीमित उपलब्धता के चलते विवेकपूर्ण तरीके से बिजली का उपयोग करने का अनुरोध किया था। 

अगले हफ्ते तक घट सकता है संकट

बिजली मंत्रालय ने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की कोयले की कुल आपूर्ति 15.01 लाख टन प्रतिदिन तक पहुंच गई। इस कारण खपत और वास्तविक आपूर्ति के बीच अंतर कम हो गया। कोयला मंत्रालय और सीआईएल ने आश्वासन दिया है कि वे अगले तीन दिन में बिजली क्षेत्र में कोयले की को बढ़ाकर 16 लाख टन प्रतिदिन करने के लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं और उसके बाद इसे बढ़ाकर 17 लाख टन प्रतिदिन किया जाएगा। 

कोयला संकट के 4 कारण 

  • अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के कारण बिजली की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी
  • कोयला खदानों में भारी बारिश से कोयला उत्पादन और ढुलाई पर प्रतिकूल प्रभाव
  • आयातित कोयले की कीमतों में भारी बढ़ोतरी
  • मानसून से पहले पर्याप्त कोयला स्टॉक न करना

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