सोने और चांदी की कीमतों में उथल-पुथल जारी है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी कीमतों में भारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
जानकार का कहना है कि कई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी, सदस्यों के भाषणों पर भी नजर रहेगी, जो सोने के लिए नई गति प्रदान कर सकते हैं।
जानकारों के मुताबिक निवेशकों ने निचले लेवल पर खरीदारी कर सौदेबाजी का फायदा उठाया। वैश्विक संकेत मिश्रित रहने के चलते आज सोना सीमित ट्रेडिंग रेंज में रहा।
सप्ताह की शुरुआत में चांदी में कमजोरी देखने को मिली, क्योंकि निवेशकों ने सप्ताहांत में हुई तेजी के बाद अपने मुनाफे को सुरक्षित कर लिया।
जनवरी से लेकर अब तक सोने और चांदी के भाव ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं। चांदी तो 4 लाख रुपये के लेवल को भी पार कर गई थी। आने वाले दिनों में सोने के भाव अमेरिकी आंकड़ों पर भी निर्भर रह सकते हैं।
सोने और चांदी की कीमत में बीते कुछ दिनों से जबरदस्त हलचल है। जानकारों का कहना है कि आज सोना और चांदी अमेरिकी डॉलर के मजबूती के चलते दबाव में रहे।
वर्ष की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी की कीमतें लगभग 60 फीसदी उछल चुकी हैं।
सुरक्षित संपत्ति की मांग कमजोर होने के चलते सोना और चांदी रिकॉर्ड हाई लेवल से नीचे आए। निवेशकों ने मुनाफा बुक किया। जानकार मानते हैं कि आगामी बजट में आयात शुल्क बढ़ने की संभावना से घरेलू कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।
मंगलवार को सेंसेक्स की 30 में से सिर्फ HDFC Bank के शेयर ही बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी की सभी 29 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सोना जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं की मांग बढ़ गई है।
चांदी ने लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की। भू-राजनीतिक चिंताओं और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच सोमवार को सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया था।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंकाओं के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से इन धातुओं को सपोर्ट जारी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने भी इतिहास रच दिया। हाजिर चांदी पहली बार 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई। इस साल अब तक सोने की कीमतों में 63,350 रुपये यानी 80.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।
जानकारों का मानना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां स्थिर नहीं होतीं और डॉलर में मजबूती नहीं आती, तब तक बुलियन मार्केट में तेजी का यह रुख जारी रह सकता है।
चांदी अपनी सर्वकालिक रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आ गई है। सोने के दाम में हाल के दिनों ज्यादा तेज बढ़ोतरी नहीं देखी गई है। जानकारों के मुताबिक, यह उतार-चढ़ाव वैश्विक आर्थिक संकेतों, निवेशकों की मुनाफावसूली और औद्योगिक मांग से प्रभावित है।
चांदी इस साल की शुरुआत (1 जनवरी 2025) में मात्र 90,500 रुपये प्रति किलोग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात की जाए तो स्पॉट गोल्ड 0.31% गिरकर 4,325.02 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार, 15 दिसंबर को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 4000 रुपये की जोरदार तेजी के साथ 1,37,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गई थी।
चांदी की कीमत में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। आने वाले साल में भी इसमें तेजी का रुझान देखने को मिल सकता है। सोने की वायदा कीमत भी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है।
ग्लोबल मार्केट में भी सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है। पिछली ट्रेडिंग सेशन में करीब दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे सोने पर दबाव देखने को मिला।
जानकार के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर की स्थिरता और संभावित फेड कट के चलते इस सप्ताह सोने की कीमतें मजबूत बनी रहीं। ग्लोबल मार्केट में सोना जल्द ही USD 4,400 के ऐतिहासिक उच्च स्तर को भी छू सकता है।
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