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Digital Mall Of Asia 2020 में होगा शुरू, भारत में देखने को मिलेगी सबसे बड़ी ई-कॉमर्स लड़ाई

भारत जहां पहले ई-कॉमर्स क्षेत्र में केवल मुट्ठी भर कंपनियां ही शामिल थी, वहां अब शीर्ष तक पहुंचने के लिए एक-दूसरे के साथ कई बड़ी और दिग्गज कंपनियां प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: October 31, 2019 18:20 IST
India will see the biggest e-commerce battle ever with...- India TV Paisa

India will see the biggest e-commerce battle ever with the entrance of new and upcoming players

डिजिटल मॉल ऑफ एशिया 2020 में शुरू होने जा रहा है। डिजिटल मॉल ऑफ एशिया एक बहुत ही अनोखी अवधारणा है, जिसे योकेशिया मॉल के संस्थापकों ने बनाया है। यह विक्रेताओं और दुकानदारों को कई विजुअल और संवेदी तत्वों से लैस एक विशाल डिजिटल जगह देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह खुदरा विक्रेताओं को अपने संबंधित शहरों में किसी विशेष उत्पाद श्रेणी या ब्रांड बेचने का विशेषाधिकार भी देगा। इसका ज़ीरो-कमीशन मॉडल इसे अनूठा बनाता है, जिसमें खुदरा विक्रेताओं को कमीशन देने के बजाय केवल मासिक किराये की एक निश्चित राशि का भुगतान करना होगा। अपनी तरह की अनूठी विशेषताओं के साथ, डीएमए से उम्मीद है, कि यह मौजूदा ई-कॉमर्स इकोसिस्टम में पहले कभी नहीं देखे गए बदलाव लाएगा, जबकि जालसाजी जैसी सभी मौजूदा ई-कॉमर्स चिंताओं को दूर करेगा।

भारत जहां पहले ई-कॉमर्स क्षेत्र में केवल मुट्ठी भर कंपनियां ही शामिल थी, वहां अब शीर्ष तक पहुंचने के लिए एक-दूसरे के साथ कई बड़ी और दिग्गज कंपनियां प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। देश भर में तेजी से डिजिटल तकनीक को अपनाने के साथ ही इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते प्रसार की वजह से ऐसा संभव हुआ है। नए जमाने के इन नवाचारों ने न केवल उभरते हुए स्टार्टअप्स को सहज खरीदारी का अनुभव देने के लिए एक अनूठा मंच दिया, बल्कि बराबर अवसरों वाले ऑफलाइन स्टोर भी प्रदान किए, जिससे उन्हें अपनी ऑफलाइन विरासत को छोड़े बिना ऑनलाइन यात्रा शुरू करने की सुविधा मिली।

एक मंच पर एक साथ आने वाली इतनी सारी कंपनियों के मद्देनजर, भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के 2017 में 24 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2021 में 84 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचाने की कल्पना की गई है। इसके अलावा, जिस दर से इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही है, हम उससे उम्मीद कर सकते हैं, कि नए स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या के अलावा भारत में अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय रिटेलर्स भी आएंगे। बदले में, इससे संगठित खुदरा बाजार में प्रमुख बढ़ावा मिलेगा और इसका साझा 2017 में 12% से बढ़कर 2021 तक 22-25 फीसदी तक पहुंच जाएगा।

भारत के ऑनलाइन शॉपिंग स्पेस पर हावी होने वाले ई-कॉमर्स दिग्गजों पर एक नजर

अमेजॉन- निर्विरोध वैश्विक कंपनियों में से एक, अमेजॉन ने एक साधारण ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में अपना सफ़र शुरू किया, जिसने धीरे-धीरे मीडिया, फ़र्नीचर, खाना और इलेक्ट्रॉनिक्स, और अन्य सहित कई प्रकार के उत्पाद देने के लिए अपनी पहुंच का विस्तार किया। और अब अमेज़ॉन प्राइम और अमेज़ॉन म्यूज़िक लिमिटेड की शुरुआत के साथ, यह ग्राहक अनुभव को शानदार स्तर पर ले गया है, जिसे बहुत लंबे समय तक हराना संभव नहीं होगा।

फ्लिपकार्ट- 2007 में स्थापित, फ्लिपकार्ट को भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में राष्ट्रीय लीडर के रूप में पहचान मिली है। अमेज़ॉन की तरह, इसकी शुरुआत किताबें बेचने से हुई थी और फिर अन्य श्रेणियों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, और जीवन शैली, मोबाइल फोन, आदि में प्रवेश किया और अब इसका अधिग्रहण वॉलमार्ट ने कर लिया है, जो यूएस में ई-कॉमर्स के सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से एक है, इसनेसभी पहलुओं में ग्राहक की पेशकश और अमेज़ॉन को भारी प्रतिस्पर्धा देने के लिए अपने मानकों को बढ़ाया है।

स्नैपडील- 2010 में एक डेली डील प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुआ, स्नैपडील 2011 में एक पूरा ऑनलाइन मार्केटप्लेस बन गया, जिसमें पूरे भारत के 3 लाख से अधिक विक्रेता शामिल थे। यह प्लेटफार्म 125,000 से अधिक क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और खुदरा विक्रेताओं से 800+ विविध श्रेणियों में 30 मिलियन से अधिक उत्पाद पेश करता है। यह भारतीय ई-कॉमर्स फर्म नवाचार के मामले में सबसे आगे रहने और अपने व्यापक ग्राहक आधार को सहज ग्राहक पेशकश देने के लिए एक मजबूत नीति का पालन करता है। इसने फ्रीचार्ज और यूनिकॉमर्स को खोने के बावजूद हाल के सालों में रिकवरी की काफी संभावनाएं दिखाई हैं।

शॉपक्लूज- भारतीय ई-कॉमर्स उद्योग में एक और प्रसिद्ध नाम, शॉपक्लूज़ की स्थापना जुलाई 2011 में की गई थी। यह एक गुरुग्राम आधारित कंपनी है जिसका वर्तमान मूल्यांकन 1.1 अरब रुपये है, और इसके प्रमुख निवेशकों के रूप में इसे नेक्सस वेंचर पार्टनर्स, टाइगर ग्लोबल और हेलियन वेंचर्स जैसे प्रमुख नामों से समर्थन मिला है। वर्तमान में, प्लेटफ़ॉर्म में कंप्यूटर, कैमरा, मोबाइल आदि जैसे नौ अलग-अलग श्रेणियों में 5 से अधिक लाख विक्रेता उत्पाद बेच रहे हैं।

पेटीएम मॉल- मौजूदा ई-कॉमर्स दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली पेटीएम ने अपना ऑनलाइन बाज़ार भी शुरू किया है - पेटीएम मॉल, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के फैशन से लेकर किराने का सामान और सौंदर्य प्रसाधन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उत्पादों, और कई अन्य तक कई तरह की चीजें उपलब्ध हैं। इस प्लेटफ़ॉर्म के बारे में अनोखी बात यह है कि बेहद प्रसिद्ध ऐप - पेटीएम के माध्यम से, यह तीसरे पक्ष को सीधे अपने उत्पादों बेचने देने के लिए एक माध्यम के रूप में काम करता है।

रिलायंस रिटेल- बाज़ार में रिलायंस की मजबूत मौजूदगी के साथ-साथ भारतीय टेलीकॉम स्पेस में रिलायंस जिओ के शानदार उपक्रम को देखते हुए, यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि रिलायंस जल्द ही रिटेल स्पेस में प्रवेश कर जाएगा। अभी की बात करें, तो इसकी योजना एक ई-कॉमर्स स्पेस बनाने की है, जो ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन मार्केट प्रोग्राम पर स्थापित किया जाएगा, और इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों को शामिल करना होगा, ताकि उन्हें अपनी बिक्री को बढ़ावा देने और उद्योग के मौजूदा लीडर्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सके।

बिग बास्केट- भारत का सबसे बड़ा ऑनलाइन सुपरमार्केट, बिग बास्केट दो प्रकार की डिलीवरी सेवाओं - एक्सप्रेस डिलीवरी और स्लॉटेड डिलीवरी के माध्यम से कई प्रकार के आयातित और खाने—पीने के उत्पाद देता है। यह ताज़ा जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, गर्म चाय आदि सहित कई प्रकार के पेय पदार्थों के साथ कटे हुएफल भी प्रदान करता है, इसके अलावा, यह न केवल कृषि के ताज़ा उत्पाद प्रदान करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि किसान को बेहतर दाम मिले। 

ग्रोफ़र्स- किराना क्षेत्र में अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक, ग्रोफ़र्स ने 2013 में अपना संचालन शुरू किया और पिछले 5 वर्षों में यह भारी ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। इसके उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला में आटा, दूध, तेल, दैनिक जरूरत के उत्पाद, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, जूस, पेय पदार्थ, व अन्य शामिल हैं। भारत भर में इसकी बढ़ती पहुंच के साथ, यह उन भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पसंदीदा सुपरमार्केट में से एक बन गया है, जो अपने घर से ही किराने की वस्तुओं की खरीदारी करना चाहते हैं।

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