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UBS Says: निफ्टी पहुंचेगा 8200 के स्‍तर पर, क्रूड के दाम जा सकते हैं 30 डॉलर प्रति बैरल तक

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Jan 05, 2016 05:04 pm IST,  Updated : Jan 05, 2016 05:39 pm IST

यूबीएस ने कहा कि उसे भारत को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस साल के अंत तक निफ्टी के 8,200 अंक तक पहुंचने का अनुमान है।

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UBS Says: निफ्टी पहुंचेगा 8200 के स्‍तर पर, क्रूड के दाम जा सकते हैं 30 डॉलर प्रति बैरल तक

नई दिल्‍ली। वैश्विक वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख एजेंसी यूबीएस ने मंगलवार को कहा है कि उसे भारत को लेकर काफी उम्मीदें हैं लेकिन उसकी रेटिंग को नए सिरे से तय करने और वर्ष 2016 के अंत तक निफ्टी के 8,200 अंक के लक्ष्य के अनुमान में बदलाव लाने के बारे में फिलहाल गुंजाइश काफी कम है। इसमें कहा गया है कि जीईएम-एपीएसी रणनीतिकार भारत को लेकर काफी उम्मीद रखते हैं।

एजेंसी नोट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17 और वित्त वर्ष 2017-18 में क्रमश: 10 फीसदी , 20 फीसदी और 18 फीसदी आय वृद्धि हासिल होने की उसे अभी भी उम्मीद लगती है। हालांकि, उसने कहा है कि 2016 में कटौती उल्लेखनीय हो सकती है और यह 8 फीसदी के आसपास रह सकती है। महंगाई के मुद्दे पर एजेंसी ने कहा है कि खुदरा मूलय सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 2016-17 में 4.6 फीसदी के आसपास बनी रहेगी।

30 डॉलर प्रति बैरल तक जाएगा क्रूड

यूबीएस के मुताबिक साल की दूसरी छमाही में ब्रेंट क्रूड 30 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। साल 2016 की पहली छमाही में अमेरिका में क्रूड का उत्पादन घटने की उम्मीद है। जब ऐसा होगा तो बाजार में स्थिरता आएगी और क्रूड कीमतों में भी स्थिरता देखने को मिलेगी। 2015 में ब्रेंट क्रूड के दाम 35 फीसदी घटे हैं। हालांकि सऊदी अरब के ईरान से करार तोड़ने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 2.4 फीसदी की तेजी देखने को मिली।

ओवर सप्लाई से 10% गिर सकती हैं कमोडिटी की कीमतें

यूबीएस के मुताबिक 2016 में कमोडिटी कीमतों में ओवरसप्लाई के कारण 10 फीसदी की और गिरावट देखी जा सकती है। कीमतों के मुद्दे पर कंपनी ने कहा कि भारत में डिफ्लेनेशन की प्रक्रिया जारी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2016-17 में सीपीआई इनफ्लेशन 4.6 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है। 2015 के दौरान सीपीआई काबू में रही। इस दौरान सीपीआई 3.66-5.4 फीसदी के बीच रही और 2016 में भी महंगाई आरबीआई के लक्ष्य के मुताबिक 6 फीसदी के नीचे बनी रहने की उम्मीद है।

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