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राजकोषीय अनुशासन पर कायम रहें राज्‍य सरकारें, बढ़ाएं बुनियादी ढांचे पर अपना खर्च: जेटली

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Apr 11, 2016 03:29 pm IST,  Updated : Apr 11, 2016 03:29 pm IST

अरुण जेटली ने राज्‍य सरकारों से राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने, बुनियादी ढांचे व विकासपरक कामों पर खर्च बढ़ाने की सलाह दी है।

राजकोषीय अनुशासन पर कायम रहें राज्‍य सरकारें, बढ़ाएं बुनियादी ढांचे पर अपना खर्च: जेटली- India TV Hindi
राजकोषीय अनुशासन पर कायम रहें राज्‍य सरकारें, बढ़ाएं बुनियादी ढांचे पर अपना खर्च: जेटली

नई दिल्ली। केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी में उछाल के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्‍य सरकारों से राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने, बुनियादी ढांचे व विकासपरक कामों पर खर्च बढ़ाने तथा लोगों को सीधे लाभ देने के लिए आधार प्‍लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

राज्य के वित्त सचिवों के दूसरे सम्मेलन में उन्होंने कहा कि विकास से अलग दूसरे कार्यों पर खर्च करने की प्रवृत्ति थोड़े समय के लिए तो आकर्षक दिख सकती है लेकिन इसका फायदा लंबे समय तक नहीं रहता। उल्लेखनीय है कि चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 10 फीसदी बढ़कर 42 फीसदी हो गई है। उन्‍होंने कहा कि राज्यों को 13वें वित्त आयोग में क्या मिल रहा था और अब क्या मिल रहा है यह स्पष्ट है। हो सकता है एक या दो मदों में यह कम हुआ हो पर कुल मिलाकर यह काफी बढ़ा है। अब हमारी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि हम खर्च करें और फिर यह सुनिश्चित करें कि हम कैसे और कहां खर्च करें।

जेटली ने कहा कि राष्ट्र का ध्यान सामाजिक क्षेत्र, बुनियादी ढांचा निर्माण और ग्रामीण क्षेत्रों पर खर्च बढ़ाने पर है। देखने में आया है कि इन क्षेत्रों पर पहले पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, इसलिए हमें उन क्षेत्रों में विशिष्ट व्यय पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने देखा है कि जब से हमने (सार्वजनिक निवेश पर) ज्यादा खर्च करने के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन पर कायम रहने की प्रवृत्ति दिखाई है, इसका ब्याज दर (कमी) और भारत की विश्वसनीयता (बढ़ने) के लिहाज से तुरंत नतीजा सामने आया है। जेटली ने कहा कि कुल मिलाकर राज्यों ने राजकोषीय अनुशासन बरकरार रखा है और यदि आप को केंद्र के साथ कुछ मुश्किल है या कहीं कोई अड़चन है तो आप अपनी भावना खुल कर रखें। कुल मिलाकर हम सहयोग की धारणा के साथ चाहेंगे कि दिक्कतें दूर हों। उन्होंने कहा कि विश्व भर में आर्थिक वृद्धि में कठिनाई है लेकिन भारत ने अपना वृद्धि का एक ठीक ठाक स्तर बरकरार रखा है। इससे कर संग्रह बढ़ा है और राज्यों के पास व्यय के लिए उपलब्ध राशि भी बढ़ी है।

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