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मार्च के अंत तक जीएसएम उपभोक्ताओं की संख्या 77.4 करोड़ के पार

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Apr 13, 2016 10:52 am IST,  Updated : Apr 13, 2016 10:52 am IST

मार्च महीने के अंत तक देश की प्रमुख टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स कंपनियों के जीएसएम उपभोक्ताओं की संख्या 77 करोड़ 39 लाख 20 हजार को पार कर गई।

मार्च के अंत तक जीएसएम उपभोक्ताओं की संख्या 77.4 करोड़ के पार, एयरटेल के पास सबसे ज्यादा ग्राहक- India TV Hindi
मार्च के अंत तक जीएसएम उपभोक्ताओं की संख्या 77.4 करोड़ के पार, एयरटेल के पास सबसे ज्यादा ग्राहक

नई दिल्ली। मार्च महीने के अंत तक देश की प्रमुख टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स कंपनियों के जीएसएम उपभोक्ताओं की संख्या 77 करोड़ 39 लाख 20 हजार को पार कर गई। इनमें सबसे ज्यादा ग्राहक एयरटेल के हैं। मार्च 2015 से अब तक उपभोक्ताओं की संख्या में 52.3 लाख की बढ़ोत्तरी हुई है।

एयरटेल के पास सबसे अधिक उपभोक्ता

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार मार्च के अंत तक जीएसएम उपभोक्ताओं की संख्या 77.392 करोड़ पर पहुंच गई है। मार्च 2015 से अब तक उपभोक्ताओं की संख्या में 52.3 लाख की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं एयरटेल ने मार्च में 25.5 लाख नए ग्रोहकों को जोड़ने में कामयाब रही। इस रिपोर्ट में एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, एयरसेल, टेलीनॉर, वीडियोकॉन और एमटीएनएल कंपनियों के उपभोक्ता डाटा की जानकारी दी गई है। टाटा टेली सर्विसेज, बीएसएनएल और रिलायंस कम्युनिकेशन जैसी जीएसएम सर्विस देने वाली कंपनियों के डाटा का इस रिपोर्ट में इस्तेमाल नहीं किया गया है।

महीने के भीतर लागू होगा मोबाइल ई-केवायसी नीयम

दूरसंचार विभाग ने एक महीने के भीतर ई-केवायसी मानदंड जारी करने की योजना बनाई है जिससे कुछ ही मिनट में मोबाइल फोन कनेक्शन सक्रिय करने में मदद मिलेगी। दूरसंचार सचिव जे एस दीपक ने क्वालकॉम समारोह के मौके पर संवाददाताओं से कहा, दूरसंचार विभाग हर साल एक सुधार केंद्रित पहल लेकर आएगा। हमें उम्मीद है कि ई-केवायसी :अपने ग्राहक को जानो: दिशानिर्देश महीने भर के बजाए कुछ ही हफ्तों में लागू होगा। सरकार उपभोक्ताओं की पहचान से जुड़े आधार पर काम कर रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक जिन ग्राहकों के पास आधार संख्या उनकी पहचान के लिए उंगली की छाप और आंखों की पहचान की जाएगी और प्रमाणित होने के बाद सिम कार्ड सक्रिय किया जाएगा। इस प्रक्रिया से देश में फर्जी कनेक्शन की संख्या घटेगी।

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