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₹27,000 करोड़ के बैंक लोन फ्रॉड मामले में इस कंपनी पर ED का एक्शन, ₹557 करोड़ की नई संपत्तियां कुर्क

 Published : Mar 27, 2025 06:57 am IST,  Updated : Mar 27, 2025 06:57 am IST

कुर्क की गई संपत्तियों में राजस्थान और पंजाब में 145 एकड़ जमीन, दिल्ली-एनसीआर में कुछ संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत 342 करोड़ रुपये है। साथ ही 112.5 करोड़ रुपये की सावधि जमा और बैंक बैलेंस भी शामिल हैं।

सितंबर 2024 में इस मामले में ईडी ने 5,115. 31 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। - India TV Hindi
सितंबर 2024 में इस मामले में ईडी ने 5,115. 31 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। Image Source : PTI

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन धोखाधड़ी में एक दिवालिया ऑटोमोटिव उपकरण बनाने वाली कंपनी एमटेक ग्रुप की 550 करोड़ रुपये से अधिक की नई संपत्तियां अनंतिम रूप से कुर्क कर ली है। ईडी ने यह एक्शन एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग कानून के तहत बीते बुधवार को लिया। पीटीआई की खबर के मुताबिक, ईडी ने कहा कि यह कार्रवाई एमटेक ऑटो लिमिटेड, एआरजी लिमिटेड, एसीआईएल लिमिटेड, मेटालिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड, कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और एमटेक समूह के प्रमोटर अरविंद धाम के अलावा कुछ अन्य के खिलाफ की गई।

ये संपत्तियां की गईं कुर्क

अनंतिम रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में राजस्थान और पंजाब में 145 एकड़ जमीन, दिल्ली-एनसीआर में कुछ संपत्तियां शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत 342 करोड़ रुपये है। साथ ही 112.5 करोड़ रुपये की सावधि जमा और बैंक बैलेंस भी शामिल हैं। ईडी ने कहा कि कुर्की में शेयर, म्यूचुअल फंड और एआईएफ (वैकल्पिक निवेश फंड) में निवेश भी शामिल हैं, जिनकी कीमत 123.9 करोड़ रुपये है। ईडी के मुताबिक, एमटेक की सभी संपत्तियों की पहचान अपराध की प्रत्यक्ष आय के रूप में की गई है और ये धाम के स्वामित्व वाली कई कंपनियों और एमटेक कंपनियों की संपत्तियों के माध्यम से हैं, जो लोन मंजूर करने वाले बैंकरों के पास हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच का आदेश मिला है

खबर के मुताबिक,  सितंबर 2024 में इस मामले में ईडी ने 5,115. 31 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं। आपको बता दें, प्रवर्तन निदेशालय ने 27 फरवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमटेक ऑटो समूह द्वारा 27,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच करने का आदेश दिए जाने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी।  प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के तहत धाम को गिरफ्तार किया और पिछले सितंबर में उनके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था।

सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के बारे में चिंता

एक्शन को लेकर ईडी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के बारे में चिंता व्यक्त की है, और ईडी द्वारा व्यापक जांच की जरूरत पर बल दिया है, भले ही संबंधित बैंकों ने खातों का निपटान कर दिया हो। यह भी गौर किया गया कि आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की तरफ से की गई शिकायतों के आधार पर सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) द्वारा आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत बैंकों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाकर बैंक लोन का अवैध रूप से दुरुपयोग करने के आरोपों पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

बैंकों को 80 प्रतिशत से अधिक का नुकसान

ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया कि उपर्युक्त कंपनियों के साथ-साथ समूह की अन्य कंपनियों को भी दिवालियापन की प्रक्रिया में ले जाया गया, जिसके समाधान के कारण बैंकों को 80 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ, इससे इन सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को काफी नुकसान हुआ। एजेंसी ने आरोप लगाया कि समूह की कंपनियों के वित्तीय विवरणों में "धोखे से हेरफेर" किया गया, ताकि अतिरिक्त धोखाधड़ी वाले ऋण प्राप्त किए जा सकें और खातों की पुस्तकों में फर्जी संपत्तियां और निवेश बनाए जा सकें।

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