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जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले लोगों की खैर नहीं, आरबीआई उठाने जा रहा ये सख्त कदम

Edited By: Alok Kumar @alocksone Published : Sep 22, 2023 01:43 pm IST, Updated : Sep 22, 2023 01:43 pm IST

आरबीआई 'जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों' की पहचान उन लोगों के रूप में करता है, जो बैंक का बकाया चुकाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन बैंक का पैसा नहीं चुकाते।

RBI- India TV Paisa
Photo:PTI आरबीआई

बैंकों से कर्ज लेकर जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले लोगों की जल्द परेशानी बढ़ने वाली है। दरअसल, आरबीआई ने विलफुल डिफॉल्टर यानी जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले पर सख्ती करने के लिए एक मसौदा जारी मास्टर प्लान जारी किया है। इसमें जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने वालों की परिभाषा तय की गई है। विलफुल डिफॉल्टर श्रेणी में उन लोगों को रखा गया है, जिनके ऊपर 25 लाख रुपये या उससे अधिक का कर्ज है और भुगतान क्षमता होने के बावजूद उन्होंने उसे लौटाने से इनकार कर दिया। आरबीआई ने नए दिशानिर्देश के मसौदे पर बैंकों और संबंधित पक्षों से 31 अक्टूबर तक टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद इस कानून को अमल में लाया जा सकता है। 

6 महीने की समय-सीमा देने का प्रस्ताव दिया

दिशानिर्देशों के मसौदे में कहा गया है, ‘‘जहां भी आवश्यक हो, कर्जदाता बकाया राशि की तेजी से वसूली के लिये उधार लेने वाले/ गारंटी देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा।’’ इसमें कहा गया है कि कर्जदाता किसी खाते को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में रखे जाने के छह महीने के भीतर जानबूझकर चूक करने वालों से संबंधित पहलुओं की समीक्षा करेगा और उसे अंतिम रूप देगा। रिजर्व बैंक ने दिशानिर्देशों के मसौदे पर संबंधित पक्षों से 31 अक्टूबर तक सुझाव देने को कहा गया है। 

कौन से लोग विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में 

आरबीआई 'जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों' की पहचान उन लोगों के रूप में करता है, जो बैंक का बकाया चुकाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन बैंक का पैसा नहीं चुकाते या उसका अन्यत्र उपयोग नहीं करते। आरबीआई के पास पहले कोई विशिष्ट समय-सीमा नहीं थी, जिसके भीतर ऐसे उधारकर्ताओं की पहचान की जानी थी। सर्कुलर में कहा गया है कि एक जानबूझकर डिफॉल्टर या कोई भी इकाई, जिसके साथ एक जानबूझकर डिफॉल्टर जुड़ा हुआ है, उसे किसी भी ऋणदाता से कोई अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा नहीं मिलेगी और वह क्रेडिट सुविधा के पुनर्गठन के लिए पात्र नहीं होगा। आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को भी समान मापदंडों का उपयोग करके खातों को टैग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। 

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