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हर घर में लगेगा स्‍मार्ट प्रीपेड मीटर, बिजली ग्राहकों को मिलेगी वितरण कंपनी चुनने की आजादी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 में नई शिक्षा नीति लाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए शिक्षा क्षेत्र को 99,300 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: February 01, 2020 13:32 IST
Budget 2020-21 annoucement Prepaid smart meter for all in 3 years - India TV Paisa

Budget 2020-21 annoucement Prepaid smart meter for all in 3 years

नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संसद में आम बजट 2020-21 पेश करते हुए कहा कि अगले तीन साल में सभी घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। इसके अलावा  बिजली ग्राहकों को वितरण कंपनी चुनने की आजादी भी मिलेगी। बजट में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए 22,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

बजट में कारोबारियों के लिए इन्‍वेस्‍टमेंट क्लियरेंस सेल के गठन को मंजूरी दी गई है। घरेलू मैन्‍यूफैक्‍चरिंग क्षेत्रों को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा। मेडिकल उपकरणों के लिए नई स्‍कीम बनेगी। मोबाइल इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स पर जोर देने की जरूरत है। निर्यात को बढ़ाने के लिए निर्विक योजना लाएंगे। कौशल विकास के लिए 3 हजार करोड़ रुपए।

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 में नई शिक्षा नीति लाने की घोषणा की है। उन्‍होंने बताया कि वित्‍त वर्ष 2020-21 के लिए शिक्षा क्षेत्र को 99,300 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। वित्‍त मंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश को भी मंजूरी देने का ऐलान किया है।  

ग्रामीण महिलाओं के लिए धान्य लक्ष्मी योजना की घोषणा की गई है। पीएम जन आरोग्य योजना के लिए 69 हजार करोड़ रुपए दिए गए हैं। स्वच्छ मिशन भारत के लिए 12 हजार 300 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। जल जीवन मिशन के लिए 3.6 लाख करोड़ रुपए दिए गए हैं।

वित्त मंत्री ने अपना दूसरा बजट पेश करते हुए कहा कि बिजली वितरण कंपनियों को पारंपरिक मीटरों को स्मार्ट प्री-पेड मीटरों से बदलना चाहिए। इसके साथ ही ग्राहकों को कभी भी बिजली वितरण कंपनी बदलने की आजादी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को तीन साल के भीतर पारंपरिक बिजली मीटरों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर के साथ बदलने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ग्रिड को 16,000 किलोमीटर से बढ़ाकर 27,000 किलोमीटर किया जाएगा।

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