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कोल इंडिया ने चालू वित्त वर्ष के पूंजीगत व्यय लक्ष्य को 30 प्रतिशत बढ़ा कर 13 हजार करोड़ रुपये किया

कोल इंडिया ने बयान में कहा कि 2020-21 के 10,000 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। कुल 3,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश में सीआईएल की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक सब्सिडियरी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लि.का हिस्सा करीब 800 करोड़ रुपये है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: January 13, 2021 17:51 IST
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Photo:PTI

कोल इंडिया बढ़ाएगी पूंजीगत व्यय

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लि.(सीआईएल) ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने पूंजीगत व्यय के लक्ष्य को संशोधित कर 13,000 करोड़ रुपये कर दिया है। कंपनी ने अपने  लक्ष्य में 3,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से कहा है कि वे आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए अपने व्यय में बढ़ोतरी करें। कोल इंडिया ने बयान में कहा कि 2020-21 के 10,000 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। कुल 3,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश में सीआईएल की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक सब्सिडियरी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लि.का हिस्सा करीब 800 करोड़ रुपये है। इसमें सीआईएल मुख्यालय का हिस्सा 585 करोड़ रुपये और महानदी कोलफील्ड्स लि.का हिस्सा 550 करोड़ रुपये है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लि.का अतिरिक्त व्यय में हिस्सा 460 करोड़ रुपये है। पूंजीगत व्यय वो खर्च होता है जो कंपनियां इमारतों, तकनीक, उपकरण जैसे एसेट्स के लिए किया जाता है।

चालू वित्त वर्ष के पहले नौ माह में सीआईएल का निवेश लक्ष्य 166 प्रतिशत बढ़कर 7,801 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वित्त वर्ष के पहले नौ माह में कंपनी का वास्तविक खर्च 4,871 करोड़ रुपये रहा है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने 2,930 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इस तरह कंपनी ने अप्रैल-दिसंबर की अवधि में मूल निवेश बजट का 78 प्रतिशत इस्तेमाल किया है। सरकार ने कंपनी को निर्देश दिया था कि वह दिसंबर के अंत तक 7,500 करोड़ रुपये के निवेश को पूरा करे। कंपनी ने कहा कि उसने कुल 7,801 करोड़ रुपये के निवेश का इस्तेमाल किया है, जो सरकार के निर्देश से 301 करोड़ रुपये अधिक है। कोरोना संकट से बाहर निकल रही अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार सार्वजनिक उपक्रमो से पूंजीगत खर्चों को बढ़ाने को कहा है जिससे अलग अलग क्षेत्रों में मांग उभरे और आर्थिक रफ्तार बढ़े। सरकार की उम्मीद है कि एक बाऱ अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी तो निजी क्षेत्र भी अपना खर्च और निवेश बढ़ाकर इसे रफ्तार देने में मदद करेगा।  

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