मुंबई। रिजर्व बैंक ने गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) को आकर्षक बनाने के लिये इसमें कुछ बदलाव किया है। योजना में सुधार का मकसद लोगों को स्वर्ण बचत खाता खोलने को सुगम बनाना है। रिजर्व बैंक ने एक अधिसूचना में कहा कि अल्पकालीन जमा को बैंक के बही-खाते पर देनदारी के अनुरूप माना जाना चाहिए।
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रिजर्व बैंक ने कहा है कि, ‘यह जमा मनोनीत बैंकों में एक से तीन साल के लिये किया जाएगा। अन्य अवधि के लिये भी जमा की अनुमति होगी। यह एक साल तीन महीने , दो साल चार महीने पांच दिन आदि हो सकता है।’ आरबीआई के अनुसार अलग - अलग अवधि के लिये ब्याज दर का आकलन पूरे हुए वर्ष तथा शेष दिन के लिये देय ब्याज पर तय किया जाएगा।
सरकार ने 2015 में यह योजना शुरू की थी। इसका मकसद घरों तथा संस्थानों में रखे सोने को बाहर लाना और उसका बेहतर उपयोग करना है। मध्यम अवधि सरकारी जमा (एमटीजीडी) 5 से 7 साल के लिये तथा दीर्घकालीनल सरकारी जमा 12 साल के लिये किया जा सकता है। इस बारे में केंद्र सरकार समय - समय पर फैसला करेगा। इसके अलावा अन्य अवधि (एक साल तीन महीने, दो साल चार महीने पांच दिन आदि) के लिये भी जमा किया जा सकता है। योजना बैंक ग्राहकों को निष्क्रिय पड़े सोने को निश्चित अवधि के लिये जमा करने की अनुमति देती है। इस पर ब्याज 2.25 से 2.50 प्रतिशत है।