1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बाजार
  4. Year Ender 2022: शेयर बाजार निवेशकों को नहीं मिला मनचाहा रिटर्न, म्यूचुअल फंड ने भी निराश किया

Year Ender 2022: शेयर बाजार निवेशकों को नहीं मिला मनचाहा रिटर्न, म्यूचुअल फंड ने भी निराश किया

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Dec 26, 2022 11:53 am IST,  Updated : Dec 26, 2022 12:27 pm IST

सेंसेक्स सालाना आधार पर (25 दिसंबर तक) सिर्फ 1.12 प्रतिशत ऊपर है, लेकिन अभी भी यह दुनिया का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला बड़ा बाजार है।

शेयर बाजार - India TV Hindi
शेयर बाजार Image Source : INDIA TV

साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल कीमतों में तेजी और दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों की सख्त मौद्रिक नीतियों से पैदा हुए दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजारों ने अन्य बाजारों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। घरेलू निवेशकों की बदौलत दलाल स्ट्रीट को वैश्विक उठा-पटक से काफी हद तक अनछुआ रखा। हालांकि, इस पूरे साल निवेशकों को मनचाहा रिटर्न नहीं मिला। साल के ज्यादातर समय तक रही सुस्ती के बाद त्योहारी सत्र में सेंसेक्स ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी और यह एक दिसंबर को अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 63,284.19 पर बंद हुआ था। हालांकि, वर्ष के अंत में तेजी की उम्मीद उस समय धूमिल होने लगी, जब चीन में कोविड संक्रमण के मामले दोबारा बढ़ने के साथ वैश्विक महामारी की एक और लहर आने की आशंका गहराने लगी। इस उठा-पटक के चलते निवेशकों को 2021 की तरह रिटर्न नहीं मिल पाया। 

सेंसेक्स सालाना आधार पर मामूली ऊपर 

सेंसेक्स सालाना आधार पर (25 दिसंबर तक) सिर्फ 1.12 प्रतिशत ऊपर है, लेकिन अभी भी यह दुनिया का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला बड़ा बाजार है। वास्तव में कोई भी प्रमुख वैश्विक सूचकांक इस साल बढ़त हासिल नहीं कर सका। इसमें अमेरिकी बाजार डॉउ जोंस (2022 में अब तक 9.24 प्रतिशत नीचे), एफटीएसई 100 (0.43 प्रतिशत नीचे), निक्केई (10.47 प्रतिशत नीचे), हैंग सेंग (15.82 प्रतिशत नीचे) और शंघाई कंपोजिट सूचकांक (16.15 प्रतिशत नीचे) शामिल हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 2022 में अब तक भारतीय इक्विटी बाजारों से रिकॉर्ड 1.21 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके विपरीत घरेलू निवेशकों ने हर गिरावट पर खरीदारी की। एनएसई में सूचीबद्ध फर्मों में 31 मार्च, 2022 को खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 7.42 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। 

एसआईपी ने शेयर बाजार को सहारा दिया 

इस दौरान एसआईपी योजनाओं के जरिये म्यूचुअल फंड निवेश भी बढ़ रहा है, जो नवंबर में (इक्विटी और ऋण खंड) 13,306 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर को छू रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रमुख (खुदरा शोध) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, जीएसटी संग्रह नवंबर में लगातार आठवें महीने 1.4 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा, जबकि ई-वे बिल मार्च 2022 से सात करोड़ की संख्या से ऊपर बना हुआ है। जीडीपी और पीएमआई जैसे अन्य आर्थिक संकेतक भी महामारी के बाद बेहतर हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत के बेहतर प्रदर्शन के पीछे मजबूत कॉरपोरेट आय के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी का भी योगदान है। 

म्यूचुअल फंड के लिए 2022 सुस्त रहा

म्यूचुअल फंड उद्योग पिछले साल के शानदार प्रदर्शन को वर्ष 2022 में दोहरा नहीं सका और पूरे साल बाजार में उतार-चढ़ाव रहने से उद्योग अपने संपत्ति आधार और निवेशकों की संख्या में बढ़ोतरी की रफ्तार बरकरार नहीं रख सका। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट को उम्मीद है कि नया साल इस उद्योग के लिए अपेक्षाकृत बेहतर साबित होगा। म्यूचुअल फंड उद्योग वर्ष 2022 में धीमी गति से बढ़ा। इस दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और बढ़ती ब्याज दरों के कारण उद्योग के लिए हालात विपरीत रहे। उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में म्यूचुअल फंड उद्योग के प्रबंधन-अधीन संपत्ति (एयूएम) में सात प्रतिशत या 2.65 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। इससे पहले वर्ष 2021 में उसके एयूएम में लगभग 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। 

नए साल में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद 

नियो के रणनीति प्रमुख स्वप्निल भास्कर ने कहा कि 2023 में म्यूचुअल फंड उद्योग की वृद्धि मौजूदा रुझान के अनुरूप ही रहने की उम्मीद है और 2023 के अंत में एयूएम के लगभग 44 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। हालांकि, एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एन एस वेंकटेश का मानना है कि 2023 में उद्योग 16-17 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि उद्योग को भारत की वृद्धि संभावनाओं और आगामी बजट घोषणाओं से समर्थन मिलेगा। मॉर्निंगस्टार इंवेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के शोध प्रबंधक एवं निदेशक कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा कि म्यूचुअल फंड उद्योग को अगले साल निवेशकों के बीच एक बेहतर निवेश विकल्प के तौर पर म्यूचुअल फंड के बारे में बढ़ती जागरुकता का फायदा मिल सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल नवंबर तक म्यूचुअल फंड उद्योग का आकार 40.37 लाख करोड़ रुपये हो चुका है जो इसका सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2021 के अंत में यह उद्योग 37.72 लाख करोड़ रुपये था जबकि वर्ष 2020 में इसका आकार 31 लाख करोड़ रुपये था। 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Market से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा