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होम लोन रिपेमेंट के इन चार बातों का रखे ध्यान, नहीं आएगी घर बेचने में कोई परेशानी

 Written By: Surbhi Jain
 Published : Jun 27, 2016 08:07 am IST,  Updated : Jun 27, 2016 09:33 am IST

Here are the four important things one should complete after the closure of Home loan

नई दिल्ली। अपना घर खरीदना हर किसी का सपना होता है। लेकिन लोग जीवन भर की जमा पूंजी खर्च करके भी सपने को साकार नहीं कर पाते हैं। इसलिए वह होम लोन का सहारा लेते हैं। आमतौर पर घर खरीदार लोन की रकम को 10 से 20 साल के लंबे समय में चुका पाते हैं। ऐसे में किसी के भी जीवन का सबसे अच्छा पल वो होता जब वह लोन की आखिरी ईएमआई या फिर फुल एंड फाइनल पेमेंट करता है। अक्सर लोन चुकता होने की खुशी में लोग रिपेमेंट के बाद की सभी जरूरी प्रक्रिया से नहीं गुजरते, नतीजन जब भविष्य में वह घर बेचने जाते हैं तो उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए इंडिया टीवी पैसा की टीम अपने पाठकों को यह बता रही है कि होम लोन की रिपेमेंट के बाद ऐसे चार कौन सी बातें हैं जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

1. कर्जदाता से ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्स वापस लेना रखें याद-

जब भी आप अपना होम लोन बंद कर रहे हों सुनिश्चित कर लें कि कर्जदाता को जमा किए गए सारे दस्तावेज वापस ले लें। दरअसल भविष्य में जब आप घर बेचने या फिर इसकी अवज में लोन लेते हैं तो सभी असल डॉक्यूमेंट्स जमा कराने होते हैं। जैसे-

  • असल सेल डीड
  • असल कन्वैअन्स डीड
  • पावर ऑफ एटोर्नी
  • पजेशन लैटर
  • पेमेंट की रसीद
  • एक कैंसिल किया हुआ चेक

अधिकतर कर्जदाता एक लेटर देते हैं जिसमें लोन लेते वक्त जिन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ती है उनके बारे में लिखा होता है। इसकी मदद से किसी भी तरह की कोई गलतफहमी नहीं होती साथ ही कर्जदाता कस्टमर के प्रति उतरदाई रहता है।

सुनिश्चित करें कि आप खुद बैंक की ब्रांच जाकर सारे दस्तावेज इकट्ठा कर लें। कर्जदाता को स्पीड पोस्ट या कुरियर के लिए न बोलें। ऐसा करने ने डॉक्यूमेंट्स के खोने के आसार ज्यादा होते हैं। डॉक्यूमेंट्स मिलने के बाद एक बार जरूर देख लें कि डॉक्यूमेंट्स में सारे पन्ने पूरे व अच्छी स्थिति में है। अगर आप विदेश में हैं तो उस स्थिति में आपको एक ऑथोराइज्ड लेटर देना होता है जो आपके आपकी अनुपस्थिति में डॉक्यूमेंट्स ले सके।

2. कर्जदाता से एनओसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट)

कर्जदाता की ओर से दिया गया एनओसी एक कानूनी दस्तावेज होता है। यह इस बात की तसदीक करता है कि आपने लोन की रिपेमेंट कर दी है साथ ही किसी भी तरह का कोई बकाया नहीं है। डॉक्यूमेंट पर कर्जदाता स्टैंप लगाकर देता है। कर्जदाता से लेने वाले दस्तावेजों में से यह सबसे अहम डॉक्यूमेंट होता है। आमतौर पर कर्जदाता एनओसी लोन की पूरी रिपेंमेंट के बाद देता है। अगर आपको यह नहीं मिलता तो उस स्थिति में अपने कर्जदाता से जरूर बात करें।

3. रजिस्ट्रार के ऑफिस से पुनर्ग्रहणाधिकार (Lien) हटा दें-

Lien का मतलब होता है कि अगर लोन लेने वाला व्यक्ति कर्ज की भरपाई नहीं कर पाया तो उस स्थिति में कर्जादाता के पास प्रॉपर्टी बेचने का अधिकार होता है। इसलिए अपन कर्जदाता से जरूर पूछ व जांच लें कि कहीं उसने प्रॉपर्टी पर Lien तो नहीं लगा रखा। यदि लगा हुआ है तो उस हटाने की मांग करें। अगर Lien नहीं हटवाते तो भविष्य में घर बेचते हुए परेशनी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस प्रक्रिया को जरूर पूरा करें।

Lien की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आप इनकंब्रैंस सर्तिफिकेट के एप्लाई करके जांच सकते हैं। इसका मतलब यह होता है कि आपके अलावा किसी और का इस प्रॉपर्टी पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि भविष्य में आपकी घर बेचने की कोई योजना न भी हो, उस स्थिति में भी सुनिश्चित करें कि आप इस प्रक्रिया को पूरा कर रहें हैं।

4. सुनिश्चित कर लें कि आपकी सिबिल रिपोर्ट में क्लोज्ड एंट्री स्पष्ट की गई है-

सिबिल रिपोर्ट में आपकी सारी लोन एंट्री और पेमेंट्स का विवरण होता है। किसी भी तरह का लोन देने से पहले कर्जदाता सिबिल रिपोर्ट जांचता है। होम लोन की रिपेमेंट करने के बाद अपने सिबिल में क्लोज्ड एंट्री जरूर कराएं। कई बार बैंक इस एंट्री को करना भूल जाते हैं। इसलिए लोन के रिपेमेंट के बाद सिबिल को अपडेट करना याद रखें।

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