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RBI रेपो रेट में करे 0.25 प्रतिशत की कटौती, अर्थशास्त्रियों के समूह ने की यह मांग

अधिकतर अर्थशास्त्रियों ने चार अप्रैल को पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती का सुझाव दिया। वहीं कुछ ने 0.50 प्रतिशत की कटौती का समर्थन किया।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Apr 03, 2019 10:52 am IST, Updated : Apr 03, 2019 10:52 am IST
RBI Monetary Policy- India TV Paisa
Photo:RBI MONETARY POLICY

RBI Monetary Policy

नई दिल्ली। पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री अरविंद विरमानी समेत अर्थशास्त्रियों के एक समूह ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में कम-से-कम 0.25 प्रतिशत की कटौती का आह्वान किया है।  केंद्रीय बैंक नए वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा गुरुवार को पेश करेगा।

विरमानी ने कहा कि यह आरबीआई को समझना है कि देश में फिलहाल वास्तविक ब्याज दर काफी ऊंची है। एसोचैम-ईग्रो फाउंडेशन द्वारा आरबीआई की मौद्रिक नीति पर आयोजित एक परिचर्चा में उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति में ढील का यह बहुत उपयुक्त समय है।

इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डवलपमेंट रिसर्च के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर तथा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य असीमा गोयल तथा कोटक महिंद्रा बैंक की उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज भी परिचर्चा में शामिल थीं। इसके अलावा परिचर्चा में बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील सेन गुप्ता, इंडियन एक्सप्रेस और सीएनएन-आईबीएन से जुड़े सुरजीत एस भल्ला भी मौजूद थे। 

अधिकतर अर्थशास्त्रियों ने चार अप्रैल को पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती का सुझाव दिया। वहीं कुछ ने 0.50 प्रतिशत की कटौती का समर्थन किया। 

गोयल ने कहा कि निजी क्षेत्र के निवेश में कमी चिंताजनक है जबकि आरबीआई द्वारा नीतिगत दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने का भी मुद्दा है। सेन गुप्ता ने कहा कि रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती को लेकर मेरा रुख सकारात्मक है। वहीं अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में और 0.25 प्रतिशत की कटौती की संभावना है। भल्ला ने कहा कि वृद्धि वास्तिवक समस्या है और ब्याज की वास्तविक दर अब भी ऊंची है। 

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