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94 साल पुराना Lakshmi Vilas Bank कैसे हो गया ढेर, जानिए इसकी पूरी कहानी

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Nov 18, 2020 12:10 pm IST,  Updated : Nov 18, 2020 12:10 pm IST

वीएसएन रामालिंगा चेट्टियार की अगुवाई में करूर के सात कारोबारियों के समूह ने 1926 में लक्ष्मी विलास बैंक की स्थापना की थी। इसका मकसद करूर के आसपास के इलाकों के व्यापारियों के कारोबार में मदद करना था।

1926 में स्‍थापित लक्ष्‍मी विलास बैंक की एक शाखा के भीतर जाता हुआ ग्राहक- India TV Hindi
1926 में स्‍थापित लक्ष्‍मी विलास बैंक की एक शाखा के भीतर जाता हुआ ग्राहक। (चित्र प्रतीकात्‍मक) Image Source : FILE PHOTO

नई दिल्‍ली। डीबीएस बैंक में विलय के बाद 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक का वजूद खत्म हो जाएगा। तमिलनाडु का यह बैंक देश से सबसे पुराने बैंकों में से एक है। उद्यमियों के एक समूह ने पश्चिमी तमिलनाडु में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इस बैंक की स्थापना की थी।  पिछली कई तिमाहियों से यह बैंक संकट से जूझ रहा था।

वीएसएन रामालिंगा चेट्टियार की अगुवाई में करूर के सात कारोबारियों के समूह ने 1926 में लक्ष्मी विलास बैंक की स्थापना की थी। इसका मकसद करूर के आसपास के इलाकों के व्यापारियों के कारोबार में मदद करना था। आसपास कई लोग ट्रेडिंग, इंडस्ट्री और कृषि व्यापार से जुड़े थे।

लक्ष्मी विलास बैंक अपना कामकाज जारी रखने के लिए पूंजी नहीं जुटा पा रहा थ। संकट से उबरने के लिए इसे एक बड़े निवेशक की तलाश थी। कई फर्मों ने इसमें निवेश करने में दिलचस्पी दिखाई, लेकिन किसी न किसी वजह से डील नहीं हो पा। पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंडियाबुल्स के ऑफर को मंजूरी नहीं दी,  फिर क्लिक्स कैपिटल का ऑफर वैल्यूएशन से जुड़े मसलों की वजह से लटका रहा।

क्लिक्स कैपिटल ने लक्ष्मी विलास बैंक की लोन बुक की वैल्यू 4,200 करोड़ रुपये लगाई थी।  लेकिन लक्ष्मी विलास बैंक के मुताबिक वैल्यूएशन 1200-1300 करोड़ रुपये थी। इस तरह दोनों की वैल्यूएशन के बीच 2500 से 3000 करोड़ रुपये का अंतर था। इस वजह से क्लिक्स का ऑफर पूरा नहीं हो सका।

आरबीआई की तरफ से नियुक्त लक्ष्मी विलास बैंक के डायरेक्टर शक्ति सिन्हा ने कहा कि हम बीच का रास्ता नहीं निकाल सके। दोनों की वैल्यूशन के बीच बड़ा अंतर रहा। उसके (लक्ष्मी विलास बैंक) लेंडिंग लोन बुक को बैंकिंग कंप्लायंस के सामने रखने पर कई गंभीर मसले सामने आए। हमने पाया कि लोन बुक का दो-तिहाई हिस्सा कोलैटरल, रिस्क वेटेज एसेट्स आदि के लिहाज से फेल कर जाएगा। हालांकि, अतिरिक्त समय मिलने पर हम यह डील पूरी कर सकते थे।

फिर, पिछले साल सितंबर में लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरधारकों ने खराब प्रदर्शन के चलते सीईओ और ऑडिटर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया। उसके बाद के पहले तीन हफ्तों में ग्राहकों ने बैंक से 1,5000 करोड़ रुपये तक निकाल लिए। सिन्हा ने कहा कि हालांकि, हम पिछले तीन हफ्तों में वन-टाइम सेटलमेंट और रिकवरी के जरिए करीब 1,000 करोड़ रुपये रिकवर करने में कामयाब रहे।

लक्ष्मी विलास बैंक के लिए संकट तब शुरू हुआ, जब इसने बड़ी रकम के लोन पर फोकस करना शुरू किया। इसने 2016 और 2017 की शुरुआत में मलविंदर सिंह और शिविदंर सिंह की निवेश इकाइयों को करीब 720 करोड़ रुपये का लोन दिया। मलविंदर और शिविंदर रैनबैक्सी और फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर हैं।

लक्ष्मी विलास बैंक ने रेलिगेयर फिनवेस्ट की तरफ से उसके पास फिक्स्ड डिपॉजिट किए गए 794 करोड़ रुपये की रकम के एवज में यह लोन दिया था। रेलिगेयर लोन का पैसा चुकाने में नाकाम रही। फिर लक्ष्मी विलास बैंक ने एफडी की रकम जब्त कर ली। इसके बाद रेलिगेयर ने लक्ष्मी विलास बैंक की दिल्ली ब्रांच के खिलाफ कोर्ट में मामला दाखिल किया। यह मामला अभी कोर्ट में है।

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