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बैंकों को एनपीए के दबाव से निकालने के लिए देश में कई बैड बैंक की जरूरत: CII

सीआईआई ने वित्त मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत अपने एक बजट पूर्व ज्ञापन में कहा है कि देश में एक नहीं अनेक बैड बैंक की जरूरत है। कोविड 19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिए सार्वजनिक पाबंदियों को लागू किए जाने के बाद एनपीए की समस्या बढ़ी है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: December 20, 2020 20:48 IST
CII का देश में कई बैड...- India TV Paisa
Photo:GOOGLE

CII का देश में कई बैड बैंक बनाने का सुझाव

नई दिल्ली। उद्योग मंडल सीआईआई ने सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट में अवरुद्ध कर्जों की भारी समस्या के निराकरण के लिए ‘बैड बैंक’ बनाने के प्रस्ताव पर विचार करने का सरकार से आग्रह किया है। बैड बैंक ऐसे वित्तीय संस्थान होते हैं जो दूसरे वित्तीय संस्थाओं और बैंकों के अटके हुए कर्जों को खरीद कर उसका प्रबंध करते है। सीआईआई ने वित्त मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत अपने एक बजट पूर्व ज्ञापन में कहा है कि देश में एक नहीं अनेक बैड बैंक की जरूरत है। कोविड 19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिए सार्वजनिक पाबंदियों को लागू किए जाने के बाद एनपीए की समस्या बढ़ी है। सीआईआई की सिफारिश है कि सरकार को ऐसे नियम कानून बनाने चाहिए जिनके आधार पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) और वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) बैंकों के एनपीए खाते खरीद सकें। सीआईआई के अध्यक्ष उदय कोटक ने कहा कि ‘कोविड के बाद के दौर में इस समस्या (फंसे हुए कर्जों) के निस्तारण के लिए बाजार में तय कीमतों पर आधारित समाधान तंत्र खोजना जरूरी है।’

फिलहाल बैंक अपने अटके कर्जों को भारतीय रिजर्व बैंक के तय नियमों के अनुसार सम्पत्ति पुनर्गठन कंपनियों को बेच सकते हैं। कर्जदाता इकाइयों को नए दिवाला कानून के तहत नीलामी की प्रक्रिया में भी डाला जा सकता है। उसमें कंपनी का प्रबंध दूसरे निवेशकों के हाथ में चला जाता है। आर्थिक समीक्षा 2017 में सार्वजनिक क्षेत्र परिसम्पत्ति पुनर्वास एजेंसी (पारा) नाम से बैड बैंक बनाने की सिफारिश की गयी थी। बैंकों का एनपीए बढ़ने से उनकी कर्ज देने की क्षमता घटती है जिसका असर बाजार पर पड़ता है। महामारी की वजह से भारतीय बैंकों में एनपीए की समस्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बैंकिंग सेक्टर महामारी के पहले से ही डूबे हुए कर्ज के दबाव से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था। हालांकि अब वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कई संस्थानों ने अनुमान दिया है कि बैंकों को महामारी के असर से बाहर निकलने में लंबा वक्त लग सकता है।

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