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जुलाई में थोक महंगाई दर में नरमी, खाद्य वस्तुओं के दाम घटने का असर

थोक खाद्य महंगाई दर 4.46 प्रतिशत पर रही है जो कि एक महीने पहले 6.66 प्रतिशत पर थी। पिछले साल के मुकाबले धान, गेहूं, सब्जियां, फलों की थोक कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: August 16, 2021 13:49 IST
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थोक महंगाई दर में नरमी

नई दिल्ली। थोक महंगाई दर में जुलाई के दौरान हल्की नरमी देखने को मिली है। महंगाई दर में इस कमी के बावजूद अभी भी थोक महंगाई दर 11 प्रतिशत के स्तर से ऊपर बनी हुई है। अप्रैल के बाद से दर 10 प्रतिशत से ऊपर है। वहीं मई के बाद से इसमें नरमी देखने को मिल रही है। जुलाई में आई गिरावट खाद्य कीमतों में नरमी की वजह से दर्ज हुई है।

जुलाई में 11.16 प्रतिशत रही महंगाई दर

आज जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में थोक महंगाई दर 11.16 प्रतिशत पर रही है। जून में ये आंकड़ा 12.07 प्रतिशत पर था। मैन्युफैक्चर्ड आइटम को छोड़कर बाकी सभी अहम कैटेगरी में महंगाई दर में नरमी का रुख रहा है। प्राइमरी आर्टिकल जिसका वेटेज 22.62 प्रतिशत है और जिसमें क्रूड पेट्रोलियम, खाद्य और गैर खाद्य उत्पाद,  तिलहन आदि आते हैं कि महंगाई दर 5.72 प्रतिशत रही है जो कि जून में 7.74 प्रतिशत थी। वहीं फ्यूल और पावर जिसका वेटेज 13.2 प्रतिशत है और जिसमें एलपीजी, पेट्रोल आदि आते हैं, की महंगाई दर 26.02 प्रतिशत रही है जो कि एक महीने पहले 32.83 प्रतिशत थी। मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्स (वेटेज- 64.23 प्रतिशत कपड़े, पेपर, कैमिकल, रबर, मेटल आदि) की महंगाई दर 11.20 प्रतिशत पर है, जो कि जून में 10.88 प्रतिशत पर थी। इसके साथ ही थोक खाद्य महंगाई दर 4.46 प्रतिशत पर रही है जो कि एक महीने पहले 6.66 प्रतिशत पर थी। पिछले साल के मुकाबले धान, गेहूं, सब्जियां, फलों की थोक कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वहीं दालों की थोक कीमतों में बढ़त दर्ज हुई है।  

खुदरा महंगाई दर में नरमी  

खाद्य वस्तुओं की कीमतें कम होने से खुदरा महंगाई दर जुलाई महीने में नरम पड़कर 5.59 प्रतिशत रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर एक माह पहले जून में 6.26 प्रतिशत और एक साल पहले जुलाई महीने में 6.73 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़े के अनुसार जुलाई महीने में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर धीमी पड़कर 3.96 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व माह में 5.15 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में 2021-22 में सीपीआई मुद्रास्फीति 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। आरबीआई के अनुसार मुदास्फीति में घट-बढ़ की जोखिम के साथ दूसरी तिमाही में इसके 5.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.3 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रहने का संभावना है। अगले वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में इसके 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। आरबीआई का लक्ष्य महंगाई दर को 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखना है। केंद्रीय बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के समय मुख्य रूप से सीपीआई मुद्रास्फीति पर ही गौर करता है।

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