कोल इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी और देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक भारत कोकिंग कोल लिमिटेड यानी BCCL का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) शुक्रवार, 9 जनवरी से निवेशकों के लिए खुल गया है। इस आईपीओ ने आते ही अपना जलवा बिखेर दिया है। महज आधे घंटे में ही यह फुल हो गया। यह वर्ष 2026 का पहला मेनबोर्ड आईपीओ है, जिसमें निवेशक 13 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) है, जिसके तहत कोल इंडिया अपनी 100% हिस्सेदारी में से हिस्सा बेच रही है। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹21 से ₹23 प्रति शेयर तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड पर यह इश्यू करीब ₹1,071 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखता है।
एंकर निवेशकों से ₹273.1 करोड़ जुटाए
आईपीओ से पहले भारत कोकिंग कोल ने एंकर निवेशकों से ₹273.1 करोड़ जुटाए हैं। इसके तहत ₹23 प्रति शेयर की दर से 11,87,53,500 इक्विटी शेयर एंकर निवेशकों को आवंटित किए गए हैं। कंपनी के अनुसार, कुल इश्यू का 50% हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए, 35% गैर-संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) के लिए और बाकी 15% खुदरा निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है।
भारत कोकिंग कोल IPO सब्सक्रिप्शन अपडेट
भारत कोकिंग कोल के आईपीओ को निवेशकों से अच्छी शुरुआती प्रतिक्रिया मिलती दिख रही है। बिडिंग के पहले दिन शुरुआती आधे घंटे में यह पब्लिक इश्यू कुल मिलाकर 1.81 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। सबसे ज्यादा मांग गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की ओर से देखने को मिली, जहां यह हिस्सा 2.02 गुना भर गया। वहीं खुदरा निवेशकों (रिटेल) का कोटा 1.52 गुना सब्सक्राइब हुआ। दूसरी ओर, योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) सेगमेंट में अभी सीमित भागीदारी देखने को मिली और यह हिस्सा 0.01 गुना ही सब्सक्राइब हो पाया था।
BCCL आईपीओ का GMP
livemint की खबर के मुताबिक, भारत कोकिंग कोल आईपीओ का ताजा ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP ₹9.25 बताया जा रहा है। अगर शेयर ₹23 के ऊपरी प्राइस बैंड पर लिस्ट होता है, तो इसकी अनुमानित लिस्टिंग कीमत करीब ₹32.25 हो सकती है। इस आधार पर निवेशकों को लगभग 40.22% तक के लिस्टिंग गेन की संभावना नजर आ रही है।
कंपनी का जान लें
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में BCCL भारत की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी रही। 30 सितंबर 2025 को समाप्त छह महीनों में कंपनी का कोयला उत्पादन 15.75 मिलियन टन रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 19.09 मिलियन टन था। 30 सितंबर 2025 तक, कंपनी देशभर में कुल 34 खदानों का संचालन कर रही थी, जिनमें 4 अंडरग्राउंड माइंस, 26 ओपनकास्ट माइंस और 4 मिश्रित (मिक्स्ड) माइंस शामिल हैं।



































