Silver Price: इस साल निवेश के सुरक्षित विकल्प और इंडस्ट्री की जबरदस्त मांग की वजह से चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने को काफी पीछे छोड़ दिया, जबकि शेयर बाजार तो चांदी की तुलना में मीलों दूर पीछे रह गया। इस साल अभी तक सोने ने 80.24 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि चांदी ने इस साल 163.50 प्रतिशत का छप्परफाड़ रिटर्न दिया है। वहीं दूसरी ओर, निफ्टी 50 इन साल 7.0 प्रतिशत और निफ्टी 500 ने महज 5.1 प्रतिशत का ही रिटर्न दिया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और कटौती की उम्मीदों के बीच चांदी में अगले साल भी तेजी बने रहने की उम्मीद है।
चांदी की कीमतों ने शुक्रवार को बनाया नया रिकॉर्ड
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, शुक्रवार को दिल्ली में चांदी की कीमत 9350 रुपये की छलांग के साथ 2,36,350 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। 31 दिसंबर, 2024 को चांदी की कीमत 89,700 रुपये प्रति किलो और 1 जनवरी, 2025 को 90,500 रुपये प्रति किलो थी। 31 दिसंबर के भाव की तुलना में इस साल चांदी की कीमतों में 1,46,650 रुपये यानी 163.5 प्रतिशत की चमत्कारी बढ़त दर्ज की गई है। चांदी में आई तेजी के बारे में आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड के डायरेक्टर (कमोडिटी और करेंसी) नवीन माथुर ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में चांदी ने अब तक (26 दिसंबर तक) लगभग 130 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिया है, जबकि इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ एमसीएक्स वायदा कीमतों में रिटर्न अब तक करीब 138 प्रतिशत तक पहुंच गया है।’’
कई वजहों से बढ़ रही है चांदी की कीमतें
उन्होंने कहा, ‘‘इस उछाल का एक कारण ये भी है कि निवेशकों का एक हिस्सा सरकारी बॉन्ड और करेंसी के मुकाबले वैकल्पिक निवेश उत्पादों में निवेश कर रहा है, जिससे चांदी में निवेश की मांग बढ़ी है। औद्योगिक मांग बढ़ने और बाजार में लगातार 5वें साल सप्लाई में कमी से भी चांदी के भाव में तेजी आई है।’’ मेहता इक्विटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी) राहुल कलंत्री ने कहा, ‘‘एआई, ईवी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे सेक्टरों में बढ़ती मांग, चांदी की कीमत में तेजी का प्रमुख कारण है। इसके अलावा, ईटीएफ में लगातार निवेश, भौतिक रूप से खरीद ज्यादा होने और निवेशकों के कमोडिटी में निवेश बढ़ाने से भी कीमतों को समर्थन मिला है।



































