रोहतासः बिहार विधानसभा चुनाव 6 और 11 नवंबर 2025 को होगा और 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे। रोहतास जिले में भी राजनीतिक गतिविधियां देखी जा रही हैं। काराकाट विधानसभा क्षेत्र में संभावित उम्मीदवार जनता के बीच जा रहे हैं। काराकाट सीट पर मौजूदा समय में सीपीआई(एमएल)(एल) का कब्जा है, जोकि महागठबंधन का हिस्सा है। इस सीट पर इस बार चुनावी मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी इस बार अपना पहला चुनाव लड़ेगी।
काराकाट के बारे में जानें
काराकाट रोहतास जिले के अंतर्गत आता है। यह एक सामान्य निर्वाचन क्षेत्र है। काराकाट में लगभग 17.61 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता हैं, जबकि मुसलमानों की संख्या लगभग 8.6 प्रतिशत है। यह मुख्यतः ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है। 11.13 प्रतिशत मतदाता शहरी हैं। इस इलाके में उपेंद्र कुशवाहा और वामपंथी दलों का प्रभाव माना जाता है। काराकाट प्राचीन काल में मौर्य साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य और पाल वंश का हिस्सा था।
काराकाट का चुनावी इतिहास
काराकाट निर्वाचन क्षेत्र साल 1967 में बना था। अब तक यहां हुए 14 विधानसभा चुनावों में भाकपा (माले) ने सबसे अधिक चार बार यह सीट जीती है। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, कांग्रेस, जनता पार्टी और जनता दल ने दो-दो बार यह सीट जीती है, जबकि जेडीयू और आरजेडी ने एक-एक बार यहां से जीत हासिल की है।
साल 2020 में CPI(ML)(L) के टिकट पर अरुण सिंह को जीत मिली थी। 2015 में आरजेडी के संजय कुमार सिंह ने यहां से परचम लहराया था। साल 2010 में जेडीयू के राजेश्वर राज ने जीत दर्ज की थी। फरवरी 2005, अक्तूबर 2005, 2005 में CPI(ML)(L) के टिकट पर अरुण सिंह ने जीत हासिल की थी। 1995 और 1990 में जनता दल के तुलसी सिंह को जीत मिली थी। 1985 में कांग्रेस की शशिरानी मिश्रा ने जीत हासिल की थी। 1980 में NP(SC) के टिकट पर तुलसी सिंह विधायक बने थे।
इस सीट पर बीजेपी को नहीं मिल सकी है जीत
सीपीआई(एमएल)(एल) के अरुण सिंह कुशवाहा चार बार से विधायक हैं। उन्होंने 2020 में भाजपा के राजेश्वर राज को 18,189 मतों से हराया था। लोकसभा चुनाव 2024 में इस सीट से सीपीआई(एमएल)(एल) के उम्मीदवार को केवल 6,599 मतों की बढ़त मिली थी। इससे भाजपा को उम्मीद है कि अगर वह अपने एनडीए सहयोगियों को एकजुट कर पाती है तो वह काराकाट में अपनी पहली जीत दर्ज कर सकती है।