बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी में गांधी मैदान में भगदड़ जैसी स्थित पैदा हो गई। कल देर शाम रावण वध समारोह संपन्न होने के बाद घर लौटने की जल्दबाजी में अचानक अफरा-तफरी मचने लगी। मैदान के मुख्य निकास द्वार पर भीड़ का दबाव बढ़ने से कुछ महिलाएं फिसलकर गिर पड़ीं। इसके बाद पीछे से आ रही भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना में चार महिलाएं घायल हो गईं। इनमें रेणु देवी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया, जबकि तीन अन्य महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
रावण दहन के बाद भगदड़ जैसी स्थिति
मसौढ़ी के एसडीपीओ राघव दयाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रावण वध कार्यक्रम में करीब 15 से 20 हजार स्थानीय लोग पहुंचे थे। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए तीन स्तरों पर इंतजाम किए गए थे। इसके अलावा मजिस्ट्रेट की भी तैनाती की गई थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, रावण वध के बाद मुख्य द्वार से बाहर निकलने के दौरान चप्पल फिसलने से कुछ लोग गिर पड़े, जिसके बाद भीड़ का दबाव बढ़ गया।
पैर फिसलने से गिरी महिलाएं
चश्मदीदों की मानें तो पुतला जलने के बाद बड़ी संख्या में लोग एक साथ मैदान से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान आगे चल रही महिलाएं लड़खड़ाकर गिर गईं और पीछे से आ रही भीड़ का दबाव उनके ऊपर बन गया। देखते ही देखते वहां अफरा-तफरी मच गई। मैदान के बाहर सड़क पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की चप्पलें बिखर गईं। लोग अपने परिजनों को तलाशते नजर आए।
स्थानीय युवाओं ने संभाला मोर्चा
घटना के बाद स्थानीय युवाओं ने तुरंत भीड़ में फंसी महिलाओं और रोते-बिलखते बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। भारी भीड़ और जाम के कारण एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई। ऐसे में कुछ युवकों ने घायल महिलाओं को अपनी स्कूटी से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीओ धनराज कुमार और एसडीपीओ राघव दयाल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थानीय युवाओं के सहयोग से भीड़ को नियंत्रित किया और स्थिति सामान्य कराई।
समय रहते प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय युवाओं की सक्रियता से हालात पर काबू पा लिया नहीं तो कई बड़ी गंभीर घटना हो सकती थी।
इनपुट- बिट्टू कुमार, पटना