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मेले और सड़क किनारे टैटू और नाक-कान छिदवाना बन रहा है HIV का कारण, DDC ने दी चेतावनी, जांच में पाए गए कई संक्रमित

 Published : Aug 20, 2026 12:25 pm IST,  Updated : Aug 20, 2026 12:26 pm IST

मेले में नाक-कान छिदवाना और टैटू बनवाना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। कई बार एक ही सुई का इस्तेमाल कई लोगों पर करते हैं। ऐसे में सुई या उपकरण किसी HIV संक्रमित व्यक्ति के खून से दूषित हों और उन्हें बिना ठीक से स्टरलाइज किए दोबारा इस्तेमाल किया जाए, तो HIV ए़ड्स का खतरा हो सकता है।

टैटू बनवाना और नाक कान छिदवाना हो सकता है खतरनाक- India TV Hindi
टैटू बनवाना और नाक कान छिदवाना हो सकता है खतरनाक Image Source : INDIA TV

अगर आप भी स्टाइलिश दिखने के चक्कर में मेलों या सड़क किनारे टैटू बनवा रहे हैं या नाक-कान छिदवा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। यह शौक आपको जिंदगी भर का दर्द दे सकता है। बिहार के जहानाबाद के विकास भवन सभागार में जिला एड्स नियंत्रण समिति के मार्गदर्शन में एचआईवी एड्स से बचाव एवं नियंत्रण को लेकर जिला स्तरीय संयुक्त कार्यकारी समूह की संवेदीकरण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त आदित्य कुमार पीयूष ने की।


बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने जिले में फैल रहे संक्रमण के पैटर्न पर चिंता जताते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त के अलावा अब सड़क किनारे और मेलों में बिना सुरक्षा मानकों के बनने वाले टैटू और नाक-कान छिदवाना संक्रमण का नया हॉटस्पॉट बनकर उभर रहा है। उप विकास आयुक्त आदित्य कुमार पीयूष ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि चंद रुपयों की बचत और थोड़ी सी लापरवाही युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित ब्लड के अलावा टैटू बनवाना संक्रमण का नया एक कारण बन रहा है। 

टैटू बनाने और नाक कान छेदने वाली सुई से हो सकता है एड्स 

टैटू बनाने में इस्तेमाल होने वाली नई नीडल की कीमत 100 रुपये या उससे अधिक होती है। पैसों की बचत और जागरूकता की कमी के कारण टैटू कलाकार एक ही सुई का इस्तेमाल कई लोगों पर कर देते हैं। यदि सुई किसी एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के शरीर में चुभी है, तो वही सुई बिना स्टरलाइज़ किए दूसरे व्यक्ति में इस्तेमाल होते ही वायरस को सीधे खून में पहुंचा देती है। ग्रामीण इलाकों और बाजारों में बिना सुरक्षा मानकों के एक ही औजार से नाक और कान छिदवाने से भी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ​ऐसे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है कि इस तरह से असुरक्षित तरीके से टैटू नहीं बनवाएं और ना ही असुरक्षित तरीके नीडल का प्रयोग करना या ब्लड वगैरह चढ़वाना चाहिए। 

आदित्य कुमार पीयूष, उप विकास आयुक्त, जहानाबाद

एचआईवी एड्स कैसे फैलता है?

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है। एड्स कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है जो साथ बैठने, छूने या खाना खाने से फैले। यह केवल असुरक्षित शारीरिक संबंध, संक्रमित सुई और दूषित ब्लड के संपर्क में आने से होता है। जिले में लगातार स्क्रीनिंग चल रही है और केस सामने आ रहे हैं। लोगों को घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।

इनपुट: मुकेश कुमार (जहानाबाद)

 

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