रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ गायत्री मंत्र और अन्य हिंदू प्रार्थनाओं का रोजाना पाठ अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि रोजाना सांस्कृतिक, शैक्षिक और मूल्यों पर आधारित गतिविधियां कराने का मकसद देशभक्ति की भावना जगाना, छात्रों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना और उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है। राज्य में नया शैक्षणिक सत्र मंगलवार से शुरू हुआ। हालांकि कांग्रेस ने स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाओं का पाठ अनिवार्य करने की जरूरत पर सवाल उठाए, क्योंकि वहां दूसरे धर्मों के छात्र भी पढ़ते हैं। उन्होंने बीजेपी सरकार पर स्कूलों में RSS का एजेंडा थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
सभी स्कूलों के लिए आदेश जारी
एक अधिकारी ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून को सभी ज़िला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को जारी आदेश के अनुसार, स्कूल अब दिन में तीन अलग-अलग समय पर अनिवार्य गतिविधियां आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि नई गाइडलाइंस के तहत, सुबह की सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनियों का पाठ शामिल होगा। दोपहर के भोजन के समय छात्र मिलकर भोजन मंत्र का पाठ करेंगे, जबकि स्कूल के दिन के आखिरी सेशन में राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र शामिल होंगे।
सख्ती से आदेश का करें पालन
अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, साथ ही उन्हें भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों से जोड़ना है। सरकार ने DEO को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और तय गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाले स्कूल मैनेजमेंट या प्रिंसिपलों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
कांग्रेस ने जताया विरोध
हालांकि सरकार के इस फैसले पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ने पारंपरिक रूप से सभी धर्मों को समान मान है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी स्कूलों में हिंदू धार्मिक मंत्रों का अनिवार्य पाठ दूसरे समुदायों के लोगों को कुरान, गुरबानी या बाइबिल की आयतों को शामिल करने की मांग करने के लिए प्रेरित कर सकता है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह संविधान की भावना के खिलाफ है।
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