दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार, 8 अक्टूबर को गोवा स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके अचानक निधन से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर है। नाना पाटेकर अपने अभिनय के साथ-साथ अपनी बेबाक सोच और जिंदगी को लेकर अलग नजरिए के लिए भी पहचाने जाते थे। खास बात यह है कि निधन से कुछ महीने पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने मौत, जिंदगी और इंसान के अस्तित्व को लेकर ऐसी बातें कही थीं, जो अब उनके जाने के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
‘सिर्फ फिल्में करने से क्या फायदा?’
सीएनएन-न्यूज18 को दिए एक खास इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने बताया था कि वह किस तरह की कहानियों का हिस्सा बनना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक एक अभिनेता के पास अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का बेहद प्रभावशाली माध्यम होता है और उसका इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कभी-कभी ‘वेलकम’ जैसी फिल्में करना ठीक है, लेकिन अगर उनके पास इतना बड़ा माध्यम होने के बावजूद वह उसके जरिए कुछ कह नहीं पाए, तो उनके अभिनेता होने का कोई खास मतलब नहीं है। नाना के लिए सिनेमा सिर्फ पर्दे पर किरदार निभाने का जरिया नहीं था। वह अपने आसपास की घटनाओं और समाज में होने वाले बदलावों से प्रभावित होते थे। उनका मानना था कि कलाकार को अपने आसपास घट रही चीजों से तकलीफ महसूस होनी चाहिए। इसी भावना को कैमरे के जरिए लोगों तक पहुंचाना एक अभिनेता की जिम्मेदारी हो सकती है।
‘जो अंदर है, उसे कैमरे के सामने निकालना है’
नाना पाटेकर ने अभिनय को अपने भीतर जमा भावनाओं और बेचैनी को बाहर निकालने का माध्यम बताया था। उन्होंने कहा था कि इंसान के भीतर जो घुटन होती है, उसे कैमरे के सामने अभिनय के जरिए बाहर लाया जा सकता है। उनके लिए किसी कहानी का हिस्सा बनना सिर्फ काम नहीं था, बल्कि उन भावनाओं को व्यक्त करने का रास्ता भी था, जिन्हें वह अपने भीतर महसूस करते थे। उनकी इस सोच से यह साफ होता है कि वह अभिनय को केवल ग्लैमर या कमाई से जोड़कर नहीं देखते थे। सामाजिक घटनाओं और मानवीय संवेदनाओं को पर्दे पर उतारने की उनकी इच्छा उनके काम में भी दिखाई देती रही।
मौत को लेकर नाना की सोच थी बिल्कुल अलग
इंटरव्यू के दौरान नाना पाटेकर ने जिंदगी और मौत की अनिश्चितता पर भी खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि इंसान अक्सर यह सोचकर जिंदगी जीता है कि उसकी मौत अभी बहुत दूर है। इसी सोच में वह चीजें जोड़ता रहता है और भविष्य के लिए सब कुछ जमा करता रहता है। लेकिन जिंदगी कब खत्म हो जाए, इसका किसी को अंदाजा नहीं होता। उन्होंने ऐसे लोगों का उदाहरण दिया था, जो एक रात तक सामान्य जिंदगी जी रहे होते हैं, खाना खा रहे होते हैं और बातचीत कर रहे होते हैं, लेकिन अगली सुबह उठ नहीं पाते। नाना का यह नजरिया अब उनके निधन के बाद बेहद भावुक कर देने वाला लग रहा है।
‘कल मरने वाला हूं तो आज अच्छा जी सकता हूं’
नाना ने जिंदगी को लेकर एक बेहद सीधी लेकिन गहरी बात कही थी। उनका मानना था कि अगर इंसान इस सच्चाई को स्वीकार कर ले कि वह कल भी मर सकता है तो शायद वह आज की जिंदगी बेहतर तरीके से जी पाएगा। उन्होंने यह भी माना था कि फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार कभी-कभी ऐसी फिल्में भी करते हैं जिनका मकसद व्यावसायिक सफलता और कमाई होता है। लेकिन जिंदगी की अस्थिरता को समझना इंसान को वर्तमान में जीना सिखा सकता है।