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'Mahakavya Shri Ramayana Katha' मूवी रिव्यू: अच्छा म्यूजिक, लेकिन कमजोर VFX और रिसर्च के बीच उलझकर रह गई फिल्म

 Written By: Aryaman Gautam
 Published : Sep 26, 2026 04:46 pm IST,  Updated : Sep 26, 2026 04:54 pm IST

रिलीज से पहले ट्रोल्स का निशाना बनने के बाद 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म का बजट कम होने के चलते पूअर वीएफएक्स नजर आते हैं। फिल्म में राम और रावण के किरदार देखने योग्य हैं। लेकिन फिल्म में कई जगहों पर तथ्यात्मक चूक

mahakavya shri ramayan katha
महाकाव्य श्री रामायण कथा। Photo: INSTAGRAM/@ABHISHEKSINGHDIRECTOR
  • फिल्म रिव्यू: महाकाव्य श्री रामायण कथा
  • स्टार रेटिंग 3/5
  • पर्दे पर: 25 सितंबर 2026
  • डायरेक्टर: Abhishek Singh
  • शैली: माइथोलॉजिकल ड्रामा

रिलीज से पहले ट्रोल्स का निशाना बनने के बाद 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म का बजट कम होने के चलते पूअर वीएफएक्स नजर आते हैं। फिल्म में राम और रावण के किरदार देखने योग्य हैं। लेकिन फिल्म में कई जगहों पर तथ्यात्मक चूक देखने को मिलती हैं।

जब भी बड़े पर्दे पर भारतीय महाकाव्यों और धार्मिक कथाओं को उतारने की बात आती है, दर्शकों की उम्मीदें हमेशा आसमान पर होती हैं। हालांकि, रिलीज से पहले ही अभिषेक सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' (Mahakavya Shri Ramayan Katha) सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल्स का निशाना बनी। कम बजट और सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई इस फिल्म को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की चर्चाएं और मजाक भी देखने को मिले।  

प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला द्वारा निर्मित इस फिल्म में मुख्य कलाकारों के तौर पर देव शर्मा ने भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई है, जबकि उनके साथ रजनीश दुग्गल और अन्य कलाकार अहम किरदारों में नजर आते हैं। कम बजट की सीमाओं में रहकर रामायण जैसी विशाल गाथा को पर्दे पर पेश करने का यह जोखिम कितना सफल रहा है और क्या यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतर पाई है? आइए विस्तार से जानते हैं इस एवरेज फिल्म का पूरा हाल।

कहानी 

फिल्म के जुड़े कई बड़े पहलुओं को हमने पहले एक्टर्स के साथ खुद साझा किया था। 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' (Mahakavya Shri Ramayan Katha) की कहानी की बात करें तो यह फिल्म एक जानी-पहचानी पौराणिक यात्रा को पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। फिल्म की कहानी शुरू होती है जब एक छोटा बच्चा अपने परिवार के साथ अयोध्या पहुंचता है और एक साधु से प्रभु श्रीराम की कथा सुनता है। इसके बाद फिल्म रामायण के अलग-अलग पड़ावों जैसे सीता स्वयंवर, वनवास और अन्य प्रमुख घटनाओं से होते हुए आगे बढ़ती है।

हालांकि, इस स्टोरी लाइन में कई जगह माइथोलॉजिकल लूपहोल्स और चूक देखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए, फिल्म में एक सीक्वेंस के दौरान जब सीता जी कंगन उतारकर दे रही हैं, तो असल पौराणिक संदर्भों के अनुसार वह कंगन नहीं बल्कि चूड़ामणि दी गई थी। ऐसे कई पहलू हैं जहां कहानी असल पौराणिक कथाओं और तथ्यों से पूरी तरह मेल नहीं खाती, जिससे कथा का मूल प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है।

अभिनय 

फिल्म में कलाकारों के अभिनय की बात करें तो मिला-जुला असर देखने को मिलता है। भगवान श्रीराम के मुख्य किरदार में देव शर्मा नजर आए हैं, जिन्होंने अपनी भूमिका को संजीदगी से निभाने की कोशिश की है। उनका अभिनय ठीक-ठाक है और उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के भाव को पर्दे पर उतारने का प्रयास किया है।

वहीं, माता सीता के किरदार में अंजलि अरोड़ा की एक्टिंग थोड़ी कमजोर और अपरिपक्व नजर आई। उनके भावों में वह गहराई और प्रभाव गायब दिखा जो इस तरह के बड़े और पवित्र किरदार के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा, फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे रजनीश दुग्गल (Rajniesh Duggall) ने अपने हिस्से का काम ठीक तरह से किया है। उन्होंने रावण के अहंकार और विद्वान रूप के संतुलन को अपने शब्दों और अभिनय के जरिए बेहतर ढंग से पर्दे पर उतारने का सही प्रयास किया है, जो सराहनीय है।

संगीत (Music)

फिल्म का म्यूजिक पक्ष इसके बेहतर हिस्सों में से एक है। फिल्म के गाने और बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ ठीक तरह से तालमेल बिठाते हैं। संगीत सुनने में कर्णप्रिय है और यह थिएटर में माहौल बनाने का काम करता है, जो इस तरह की पौराणिक फिल्मों के लिए एक जरूरी पॉजिटिव पॉइंट साबित होता है।

कमजोर वीएफएक्स (VFX) और तकनीकी पक्ष

अगर फिल्म के सबसे कमजोर और निराश करने वाले पहलू की बात की जाए, तो वह इसके विजुअल इफेक्ट्स (VFX) हैं। साल 2026 के इस दौर में इतने गंदे और बेहद बुरे टेलीविजन स्तर के VFX का इस्तेमाल किया गया है, जो हैरान करने वाला है। आज के समय में जब तकनीक बहुत आगे निकल चुकी है, इतने घटिया वीएफएक्स के साथ बड़े पर्दे पर फिल्म बनाना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या ऐसी तकनीकी गुणवत्ता के साथ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर टिक पाएंगी? यह कमजोर ग्राफिक्स फिल्म के पूरे सिनेमैटिक अनुभव को काफी हद तक गिरा देते हैं।

आखिरी फैसला

फिल्म के अंत में बात करें कि क्या यह वाकई एक अच्छी फिल्म है, तो यह बतौर कहानी और एक्टर्स के रूप में एक सही और ईमानदार दर्शाने की कोशिश जरूर करती है, लेकिन इसमें कई सारे कहानी के लूपहोल्स और पौराणिक तथ्यों की चूक शामिल है। कुल मिलाकर, यह एक एवरेज मूवी साबित होती है, जहाँ एक्टर्स के प्रयास और ठीक-ठाक संगीत इसे संभालते हैं, लेकिन बेहद कमजोर विजुअल इफेक्ट्स इसे काफी पीछे खींच लेते हैं, जिसकी वजह कहीं ना कहीं फिल्म का कमजोर बजट भी है।

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