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Nikita Roy Review: अंधविश्वास और सच्चाई के बीच की कहानी है कुश सिन्हा की सुपरनैचुरल थ्रिलर, दमदार हैं सोनाक्षी

 Written By: जया द्विवेदी
 Published : Jul 18, 2025 12:58 pm IST,  Updated : Jul 18, 2025 03:04 pm IST

'निकिता रॉय' आज सिनेमाघरों में रिलीज कर दी गई है। फिल्म की कहानी कैसी है और एक्टर्स का काम कैसा है, ये जानने के लिए पूरा रिव्यू पढ़ें।

nikita roy
सोनाक्षी सिन्हा और अर्जुन रामपाल। Photo: FILM SCREEN GRAB
  • फिल्म रिव्यू: निकिता रॉय
  • स्टार रेटिंग 3.5/5
  • पर्दे पर: 18/07/2025
  • डायरेक्टर: कुश सिन्‍हा
  • शैली: सुपरनैचुरल थ्रिलर

डायरेक्टर के तौर पर पहली बार कमान संभालते हुए कुश सिन्हा ने ‘निकिता रॉय’ में डरावनी कहानी और मर्डर की पहेली को अच्छी तरह दिखाया है। फिल्म डर और विश्वास के खेल पर बनी है, जिसमें अंधविश्वास और सच्चाई के बीच की लड़ाई को असरदार तरीके से दिखाया गया है और वह भी बिना किसी पुराने डरावने ट्रिक के। कहानी की शुरुआत अर्जुन रामपाल के किरदार से होती है, जो अपने घर में किसी अनजाने डर से जूझ रहे हैं। यहां डर चीखता नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आपके अंदर उतरता है। डायरेक्टर ने डर और बेचैनी को कहानी के साथ धीरे-धीरे पिरोया है, जिससे हर सीन में सस्पेंस बना रहता है। 116 मिनट की ये फिल्म कितना प्रभावी है, ये जानने के लिए पढ़ें पूरा रिव्यू।

कैसी है कहानी

लंदन में स्थापित यह कहानी सनल रॉय (अर्जुन रामपाल) और निकिता (सोनाक्षी सिन्हा) नामक भाई-बहनों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो तर्कवाद को बढ़ावा देने वाले समाज में रहते हैं और अंधविश्वासों का खंडन करते हैं। सनल एक 'आध्यात्मिक' गुरु अमरदेव (परेश रावल) का पर्दाफाश करने का लक्ष्य रखता है, जिसके कई अनुयायी हैं। हालांकि, जल्द ही सनल को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाया जाता है - हत्या या आत्महत्या? पुलिस इस मामले को बंद करना चाहती है, लेकिन अपने भाई के प्रति समर्पित निकिता को गड़बड़ी का संदेह है। अपने भाई के सहयोगियों की अनिच्छा देखकर, वह खुद जांच करने का फैसला करती है। उसका दोस्त, जॉली (सुहैल नैयर), जिसमें निकिता के लिए एकतरफा भावनाएँ हैं, उसकी मदद करने का फैसला करता है। उनकी जांच सनल के घर से शुरू होती है, जहाँ रहस्यमय घटनाएं होती हैं और सनल की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में गुप्त पहलुओं का खुलासा होता है।

उनकी जांच का पहला चरण फ्रेया (कलिरोई त्ज़ियाफ़ेटा) है, जिसे सनल ने अमरदेव के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया था। जब निकिता और जॉली फ्रेया की दूरस्थ झोपड़ी में पहुँचते हैं, तो फ्रेया अजीब व्यवहार करती है और अंततः अपना गला काट लेती है। फ्रेया की मौत के लिए पुलिस के शक के घेरे में आने और उनके रिश्ते में बढ़ते तनाव के साथ, निकिता और जॉली अमरदेव का सामना करते हैं। अमरदेव शांत भाव से निकिता को चुनौती देता है कि वह एक सप्ताह के भीतर उसे बेनकाब करके दिखाए। इसके बाद, निकिता के साथ भयावह घटनाएँ होने लगती हैं (जिसमें एक मासूम बिल्ली भी शामिल है), और एक भ्रष्ट ब्रिटिश पुलिस वाला मामले को और जटिल बना देता है। क्या यह सब अमरदेव का काम है? या कोई अलौकिक शक्ति शामिल है? क्या अमरदेव का राक्षसी शक्तियों से कोई संबंध है? क्या निकिता भी अपने भाई की तरह ही अंत को प्राप्त होगी, या वह अमरदेव के असली चेहरे को उजागर करने में सफल होगी?

कैसा है एक्टर्स का काम

कहानी की मुख्य पात्र निकिता रॉय हैं, जिन्हें सोनाक्षी सिन्हा ने बेहद प्रभावशाली ढंग से निभाया है। निकिता एक व्यावहारिक लेखिका और कट्टर संशयवादी हैं, जो झूठे आध्यात्मिक दावों का पर्दाफाश करने में अपना जीवन समर्पित करती हैं। लेकिन जब उनका भाई लंदन में अचानक और संदिग्ध परिस्थितियों में मर जाता है, तो उनका ठोस और तार्किक नजरिया टूटने लगता है। इस गहरे दुख और सवालों की आग में जलते हुए, निकिता एक जांच शुरू करती हैं जो उनकी समझ से परे, असामान्य और परेशान करने वाली घटनाओं से उन्हें रूबरू कराती है। सोनाक्षी सिन्हा ने अपने किरदार में दर्द, बढ़ते संदेह और जुझारूपन के बीच एक बेहतरीन संतुलन पेश किया है, जो उनके अब तक के सबसे सूक्ष्म और गहन अभिनय में से एक माना जा सकता है।

सुहैल नैयर ने निकिता के पूर्व सहयोगी के रूप में एक सधी हुई, विश्वसनीय भूमिका निभाई है, जो फिल्म के भावनात्मक पहलू को मजबूती प्रदान करती है, लेकिन कभी भी मुख्य रहस्य की परतों को धुंधला नहीं करती। वहीं, परेश रावल ने पूज्य आध्यात्मिक गुरु अमरदेव के किरदार में एक बेहद रहस्यमय और खतरनाक छवि प्रस्तुत की है। उनका शांत और संयमित अभिनय दर्शाता है कि असली खतरे अक्सर चुप्पी के पीछे छिपे होते हैं, जो उन्हें फिल्म की सबसे आकर्षक और यादगार मौजूदगी बनाता है।

सोनाक्षी सिन्हा की मजबूत भूमिका, परेश शानदार

सोनाक्षी सिन्हा 'निकिता रॉय' के रूप में अपने करियर का सबसे गंभीर और परिपक्व अभिनय करती नजर आती हैं। वे एक ऐसी राइटर बनी हैं जो झूठे बाबाओं और फर्जी आध्यात्मिक दावों का पर्दाफाश करती है, लेकिन अपने भाई की मौत के बाद ऐसी जाल में फंसती हैं जिससे निकलना आसान नहीं। सुहैल नय्यर फिल्म में सोनाक्षी के एक्स-पार्टनर की भूमिका में हैं। उनके और निकिता के पुराने रिश्ते की कहानी मुख्य कहानी पर भारी नहीं पड़ती, लेकिन उनके बीच का इमोशनल कनेक्शन इस मिस्ट्री में गहराई जोड़ता है। परेश रावल अमरदेव के रूप में सामने आते हैं, एक सम्मानित आध्यात्मिक गुरु जिसकी मुस्कान के पीछे खतरनाक मंसूबे छिपे हैं। परेश रावल का हर सीन उनकी अनुभवी एक्टिंग और डर पैदा करने वाले एक्सप्रेशन से जिंदा हो उठता है।

शानदार कैमरा वर्क और कहानी की पकड़

पवन कृपलानी द्वारा लिखी गई स्क्रिप्ट बेहद मजबूत है और सिनेमेटोग्राफी डर और रहस्य को बड़े सधे तरीके से दिखाती है। कुश सिन्‍हा ने डराने वाले घिसे-पिटे तरीकों की बजाय लेयर्ड स्टोरीटेलिंग को चुना है, जो कहानी को और भी मजबूत बनाती है। ‘निकिता रॉय’ को न‍िक्‍की विक्‍की भगनानी फिल्म्स, निकिता पाई फिल्म्स लिमिटेड और अन्य प्रोड्यूसर्स ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म के हर फ्रेम में इसकी शानदार प्रोडक्शन वैल्यू साफ नजर आती है। सोनाक्षी सिन्हा का करियर बेस्ट परफॉर्मेंस, परेश रावल की डरावनी मौजूदगी और कुश सिन्‍हा की मजबूत पकड़ के चलते यह फिल्म रहस्य और सामाजिक संदेश का दिलचस्प संगम बन जाती है।

क्यों देखनी चाहिए फिल्म

‘निकिता रॉय’ इसलिए देखनी चाहिए क्योंकि यह सिर्फ एक डरावनी कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी फिल्म है जो डर के बहाने समाज में फैले अंधविश्वास, झूठे गुरुओं और लोगों को गुमराह करने वाले सिस्टम पर सवाल उठाती है। सोनाक्षी सिन्हा का अब तक का सबसे गंभीर अभिनय, परेश रावल की खामोश लेकिन खौफनाक मौजूदगी और कुश सिन्हा की दिलचस्प निर्देशन शैली इस फिल्म को सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी बना देती है।

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