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PHOTOS: गुस्साए बैल के सामने ये आदमी ऐसे क्यों पड़ा है? बेहद दिलचस्प है वजह

जल्लीकट्टू तमिलनाडु की प्राचीन परंपरा है, जो पोंगल के दौरान मनाई जाती है। इसमें लोग बिना हथियार के ही अपने हाथों की ताकत से बैल को काबू करने की कोशिश करते हैं।

Edited By: Vineet Kumar Singh
Published : Feb 25, 2026 11:10 pm IST,  Updated : Feb 25, 2026 11:10 pm IST
तमिलनाडु में जल्लीकट्टू एक बहुत पुरानी और रोमांचक परंपरा है। यह खेल पोंगल त्योहार के दौरान मनाया जाता है, खासकर मट्टू पोंगल के दिन। इसमें एक बेकाबू बैल को लोग बिना किसी हथियार के हाथों से पकड़कर काबू करने की कोशिश करते हैं। यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि तमिल संस्कृति का एक प्रतीक है। जल्लीकट्टू की यह तस्वीर तिरुचिरापल्ली के जमाल मोहम्मद कॉलेज से है। अब इस बैल ने इस शख्स के साथ क्या किया, यह तो तस्वीर देखकर ही पता चल जाता है। वैसे जल्लीकट्टू के खेल में ऐसे दृश्य आम हैं।
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तमिलनाडु में जल्लीकट्टू एक बहुत पुरानी और रोमांचक परंपरा है। यह खेल पोंगल त्योहार के दौरान मनाया जाता है, खासकर मट्टू पोंगल के दिन। इसमें एक बेकाबू बैल को लोग बिना किसी हथियार के हाथों से पकड़कर काबू करने की कोशिश करते हैं। यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि तमिल संस्कृति का एक प्रतीक है। जल्लीकट्टू की यह तस्वीर तिरुचिरापल्ली के जमाल मोहम्मद कॉलेज से है। अब इस बैल ने इस शख्स के साथ क्या किया, यह तो तस्वीर देखकर ही पता चल जाता है। वैसे जल्लीकट्टू के खेल में ऐसे दृश्य आम हैं।
जल्लीकट्टू की शुरुआत 2000 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती है। इतिहासकार बताते हैं कि यह खेल 400 ईसा पूर्व से चला आ रहा है। तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। पहले इसे वर चुनने और बैलों की ताकत दिखाने के लिए खेला जाता था। आज भी यह तमिल लोगों की पहचान बना हुआ है। तिरुचिरापल्ली से आई यह तस्वीर बता देती है कि इस खेल में कितना रोमांच और खतरा है।
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जल्लीकट्टू की शुरुआत 2000 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती है। इतिहासकार बताते हैं कि यह खेल 400 ईसा पूर्व से चला आ रहा है। तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। पहले इसे वर चुनने और बैलों की ताकत दिखाने के लिए खेला जाता था। आज भी यह तमिल लोगों की पहचान बना हुआ है। तिरुचिरापल्ली से आई यह तस्वीर बता देती है कि इस खेल में कितना रोमांच और खतरा है।
तमिलनाडु के लोग इस खेल के साथ दिल से जुड़े हुए हैं। यह किसानों और उनके बैलों के बीच के रिश्ते को दिखाता है। बैल खेती में बहुत मदद करते हैं, इसलिए पोंगल पर उनका सम्मान किया जाता है। जल्लीकट्टू में जीतने वाले को इनाम मिलता है और इसे साहस, ताकत व सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
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तमिलनाडु के लोग इस खेल के साथ दिल से जुड़े हुए हैं। यह किसानों और उनके बैलों के बीच के रिश्ते को दिखाता है। बैल खेती में बहुत मदद करते हैं, इसलिए पोंगल पर उनका सम्मान किया जाता है। जल्लीकट्टू में जीतने वाले को इनाम मिलता है और इसे साहस, ताकत व सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
बता दें कि पशु क्रूरता के आरोपों के चलते जल्लीकट्टू पर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया था। लेकिन तमिलनाडु के लोगों ने इसे लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए। इसके बाद 2017 में राज्य सरकार ने कानून बनाया और 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी दे दी। अब सख्त नियमों के साथ यह खेल सुरक्षित तरीके से होता है।
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बता दें कि पशु क्रूरता के आरोपों के चलते जल्लीकट्टू पर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया था। लेकिन तमिलनाडु के लोगों ने इसे लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए। इसके बाद 2017 में राज्य सरकार ने कानून बनाया और 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी दे दी। अब सख्त नियमों के साथ यह खेल सुरक्षित तरीके से होता है।
मौजूदा समय में भी जल्लीकट्टू जोर-शोर से मनाया जा रहा है। यह परंपरा अब भी पूरी ताकत के साथ जीवित है और तमिलनाडु की संस्कृति को दुनिया के सामने लाती है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि लोग इस त्योहार को लेकर कितने उत्साहित रहते हैं।
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मौजूदा समय में भी जल्लीकट्टू जोर-शोर से मनाया जा रहा है। यह परंपरा अब भी पूरी ताकत के साथ जीवित है और तमिलनाडु की संस्कृति को दुनिया के सामने लाती है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि लोग इस त्योहार को लेकर कितने उत्साहित रहते हैं।
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