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भविष्य में पड़ने वाले हैं केले के लाले

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 05, 2016 01:29 pm IST,  Updated : Jan 05, 2016 01:29 pm IST

केला एक ऐसा फल है जो हर कोई सारी दुनियां में बहुत शौक़ से खाया जाता है। ये कितना फ़ायदेमंद होता है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी खेल के

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केला एक ऐसा फल है जो हर कोई सारी दुनियां में बहुत शौक़ से खाया जाता है। ये कितना फ़ायदेमंद होता है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी खेल के बीच में इसे खाते रहते हैं क्योंकि इससे ऊर्जा मिलती है। लेकिन आपको हैरानी होगी कि एक दिन ऐसा आने वाला है जब केला हमारी ज़िंदगी से निकल जाएगा।  

नीदरलैंड्स के रिसर्चरों के एक नये शोध के अनुसार भविष्य में केले की सबसे ज़्यादा खाई जाने वाली क़िस्म ग़ायब हो जाएगी। इसे कैवेंडिश कहा जाता है। शोध के अनुसार "पनामा बीमारी" इन्हें पूरी तरह नष्ट कर देगी।

इसके पहले 60 के दशक में इस बीमारी के कारण "ग्रॉस मिशेल" नाम की केले की किस्म बुरी तरह प्रभावित हुई थई। केले के पेड़ को यह बीमारी फंगस के लगने से होती है और टीआर4 नाम का फंगस केलों के लिए बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों को डर है कि जल्द ही यह फंगस लातिन अमेरिका तक पहुंच जाएगा। यहीं दुनिया के 80 फ़ीसद कैवेंडिश केले उगाए जाते हैं।

टीआर फंगस की पहचान पहली बार 1994 में हुई थी। ताइवान में केलों के खेत खराब होने पर जब शोध हुआ, तब तीन दशक बाद जा कर उसकी असली वजह, टीआर फंगस का पता चला। टीआर4 एक ऐसा फंगस है जो 30 साल तक मिट्टी में बिना किसी हरकत के रह सकता है और फिर अचानक से सक्रिय हो कर पूरे खेत को बरबाद कर देता है। ये पौधे को इस हद तक सुखा देता है कि वह पानी की कमी से मर जाता है। ताइवान के बाद यह पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया में फैला। ये फंगस 2013 के बाद जॉर्डन, लेबनान, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में भी पाया गया है।

बाज़ार में उपलब्ध केलों को जिस तरह से उगाया जाता है, उनमें खुद को बीमारियों से बचाने की क्षमता काफी कम होती है इसीलिए वैज्ञानिकों को डर है कि ये केले खुद को फंगस से बचा नहीं पाएंगे और इनका पूरी तरह सफाया हो जाएगा और दुनिया में केले के लाले पड़ जाएंगे। लेकिन इसके पहले कि ये नैबत आए वे ऐसी नई किस्म बनाना चाहते हैं जिसकी रोग प्रतिरोधी क्षमता अच्छी हो।

रिपोर्ट में कहा गया है, "1960 के दशक में कैवेंडिश ने ग्रॉस मिशेल की जगह ली थी। अब हमें एक नई किस्म की जरूरत है जो कैवेंडिश की जगह ले सके।"

लेकिन इसके लिए नए सिरे से काम करना होगा. इसमें भारी निवेश की भी जरूरत पड़ेगी और अंत में केले की इस नई किस्म की कीमतें भी काफी ज्यादा होंगी. हालांकि इस पर काम शुरू होना अभी बाकी है. अगर वक्त रहते कुछ नहीं किया गया, तो भविष्य में केले सिर्फ किस्से कहानियों में ही नजर आया करेंगे.

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