नई दिल्ली: अनुपालन खिड़की बंद होने के साथ ही काला धन कानून गुरुवार से लागू हो गया। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) अध्यक्ष अनिता कपूर ने यहां संवाददाताओं से कहा, "अनुपालन खिड़की बंद होते ही कानून अपने सभी प्रावधानों के साथ काला धन की घोषणा नहीं करने वालों पर लागू हो जाएगा।"
अघोषित विदेशी आय और संपत्ति (कराधान) अधिनियम 2015 के जरिए पहली बार विदेश में जमा संपत्ति पर देश में कर लगाने का प्रावधान किया गया है।
कानून में संपत्ति की घोषणा करने के लिए एक अनुपाल खिड़की यानी एक निश्चित अवधि दी गई, जिसके अंदर घोषणा करने वाले पर 30 फीसदी कर लगाने तथा अतिरिक्त 30 फीसदी जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
इस समयावधि के अंदर काले धन की घोषणा नहीं करने पर दोषियों पर 30 फीसदी कर के अलावा 90 फीसदी जुर्माना, यानी प्रभावी तौर पर कुल काले धन पर 120 फीसदी कर लगाने का प्रावधान है।
638 ने की 58 करोड़ डॉलर संपत्ति की घोषणा
देश के नागरिकों द्वारा विदेश में जमा किए गए काले धन को वापस लाने की मुहिम के तहत 638 लोगों ने कुल 3,770 करोड़ रुपये (58 करोड़ डॉलर) विदेश में जमा रखने की घोषणा की। यह बात गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कही गई।
बयान में कहा गया है, "घोषणा स्वीकार करने के लिए निर्दिष्ट अधिकारी 30 सितंबर 2015 को मध्य रात तक काम करते रहे।"
बयान के मुताबिक, इसका कारण यह था कि आयकर कार्यालय में काले धन की घोषणा करने वालों का तांता लग गया था।
बयान के मुताबिक, "घोषणा स्वीकार करने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल भी मध्य रात तक खुला रहा।"
इस बीच केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अध्यक्ष अनिता कपूर ने गुरुवार को कहा कि काले धन की घोषणा को सरल करने के लिए सरकार ने हर संभव कदम उठाए।
उन्होंने कहा, "हमने लोगों की कई जिज्ञासा का जवाब दिया।"
उन्होंने कहा, "हमारी ओर से यह सुनिश्चित करने की हर संभव कोशिश रही कि जो संपत्ति की घोषणा करना चाहते हैं, उन्हें पूरी सुविधा दी जाए।"
उन्होंने कहा, "अनुपालन अवधि समाप्त हो जाने के बाद कानून के समस्त प्रावधानों के साथ काला धन की घोषणा नहीं करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।"
काला धन अधिनियम में पहली बार विदेश में जमा रखी गई संपत्ति पर देश में कर लगाने का प्रावधान किया गया है।
सरकार के पास विदेश में जमा काले धन के बारे में कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है, लेकिन अनाधिकारिक अनुमानों के मुताबिक यह राशि 466 अरब डॉलर से लेकर 1,400 अरब डॉलर तक हो सकती है।