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आखिर दाऊद इब्राहिम ने भाई अनीस को क्यों बुरी तरह पीटा '

 Written By: India TV News Desk
 Published : Nov 18, 2015 08:31 am IST,  Updated : Nov 18, 2015 12:59 pm IST

नई दिल्ली: अंडरवर्ल्‍ड डॉन दाऊद इब्राहिम को जब पता चला कि उसके भाई अनीस ने बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त को हथियार दिए हैं तो वह आगबबूला हो गया था। इस हरकत पर उसे इतना गुस्‍सा

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आखिर दाऊद इब्राहिम ने भाई अनीस को क्यों बुरी तरह पीटा ?

नई दिल्ली: अंडरवर्ल्‍ड डॉन दाऊद इब्राहिम को जब पता चला कि उसके भाई अनीस ने बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त को हथियार दिए हैं तो वह आगबबूला हो गया था। इस हरकत पर उसे इतना गुस्‍सा आया था कि उसने अपने छोटे भाई की पिटाई तक कर डाली थी। यह दावा किया गया है कि दिल्‍ली पुलिस के पूर्व कमिश्‍नर नीरज कुमार की किताब- ‘Dial D for Don’ में।

नीरज कुमार के मुताबिक, ‘जून 2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग की जांच के दौरान उनके पर्सनल मोबाइल पर एक अनजान नंबर से एक फोन आया। दूसरी ओर से जो आवाज आई वह दाऊद इब्राहिम की थी। उसने कहा, ‘क्या साहेब, आप रिटायर होने जा रहे हैं? अब तो पीछा छोड़ दो।’ ‘Dial D for Don’ में नीरज कुमार ने दावा किया है कि दाऊद इब्राहिम से उनकी अब तक चार बार फोन पर बात हुई। इस दौरान उन्‍होंने डॉन से मुंबई बम ब्‍लास्‍ट के बारे में भी पूछा था।

दाऊद ने नीरज कुमार को यह भी बताया था कि मुंबई धमाकों के बाद उसने तत्‍कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर को सफाई देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने उसे बुरी तरह डांट दिया था।

मुंबई धमाकों में भूमिका से बार-बार इनकार कर रहे दाऊद से जब नीरज कुमार ने यह पूछा कि क्‍या तुमने संजय दत्‍त को हथियार देने पर अपने भाई की पिटाई की थी? तो इस बात को उसने माना। जब उससे आगे पूछा कि - ‘क्या तुम इस बात से भी इनकार करते हो कि तुम्हारे छोटे भाई अनीस इब्राहिम ने बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त को हथियार भेजे थे?’ इस पर दाऊद ने कहा- हां। गौरतलब है कि संजय दत्‍त इसी मामले में दोषी पाए गए हैं और यरवडा जेल में सजा काट रहे हैं।

किताब के मुताबिक, एक बार दाऊद ने नीरज कुमार से कहा था, ‘साहेब, इसके पहले कि मैं कुछ बताऊं, पहले आप बताएं कि आपको क्या लगता है कि मैंने मुंबई में ब्लास्ट कराए हैं?’ इस पर नीरज कुमार ने दाऊद से कहा, ‘तुम मेरे सवाल का जवाब एक और सवाल से क्यों दे रहे हो? मैं क्या सोचता हूं, इसका तुमसे कोई मतलब नहीं है। अगर तुम्हें कुछ और कहना है तो कहो।’

नीरज ने किताब में लिखा, ‘दाऊद ने बिल्कुल मुंबईया लहजे में मेरे साथ बात की। उसकी बातों से ऐसा नहीं लगता था कि उसे किसी बात का डर है। न ही उसने मुझे खुश करने की कोशिश की।’

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्हें 1994 में 10, 20 और 22 जून को दाऊद के फ़ोन आए थे। उस वक्त नीरज सीबीआई में थे और 1993 ब्लास्ट की जांच में जुटे थे। फ़ोन पर दाऊद खुद को निर्दोष बता रहा था।

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