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दिल्ली को न्यूक्लियर मिसाइल से बचाने की तैयारी, लगाए गए राडार

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 06, 2015 10:21 am IST,  Updated : Apr 06, 2015 10:59 am IST

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने देश की राजधानी दिल्ली को न्यूक्लियर मिसाइल सुरक्षित करने का फैसला किया है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता वाले दो राडार राजधानी लगाए

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नई दिल्ली: मोदी सरकार ने देश की राजधानी दिल्ली को न्यूक्लियर मिसाइल सुरक्षित करने का फैसला किया है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता वाले दो राडार राजधानी लगाए गए हैं। इस कवर का काम पूरा होने के बाद यह शील्ड 5,000 किमी की दूरी से फायर की गई मिसाइलों को भी बीच में ही रोक लेगा।

सीनियर सरकारी अधिकारियों ने ईटी को बताया कि, "राडार लगाना देश के बड़े शहरों को मिसाइल कवर देने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। अगला कदम मुंबई को कवर करने के लिए उठाया जाएगा।"

वॉशिंगटन, पेइचिंग, पेरिस, लंदन और तेल अवीव जैसे दुनिया के कई शहरों में मिसाइल शील्ड्स हैं।

भारत का मिसाइल शील्ड प्रोग्राम पिछले दो वर्षों में सुस्त हो गया है। यह प्रोग्राम साल 2006 में शुरू किया गया था और 2009-12 के दौरान इसके लिए कई टेस्ट भी किए गए थे। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 2013 और 2014 में काफी सुस्ती आ गई थी। अप्रैल 2014 में एक टेस्ट विफल भी हो गया था। अधिकारियों ने बताया कि मोदी सरकार ने मई में सत्ता संभालने के साथ ही मिसाइल शील्ड प्रोग्राम में तेजी लाने का आदेश दे दिया था।

इस दिशा में सबसे पहले स्वॉर्डफिश को एनसीआर में लगाया गया। यह इस्राइल की मदद से बनाया गया राडार है। यह 800 किमी की दूरी से ही मिसाइलों का पता लगा सकता है। इसके बाद 2016 तक मिसाइल इंटरप्रेटर यूनिट्स को स्थापित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल टेस्ट तो नियमित तौर पर किए जाएंगे। इसी हफ्ते ओडिशा के व्हीलर आइलैंड से एक एयर डिफेंस मिसाइल का टेस्ट होगा। व्हीलर आइलैंड मिसाइल टेस्टिंग के लिए देश का एक अहम ठिकाना है। मिसाइल शील्ड सिस्टम के लिए हर साल दर्जनों मिसाइलों को बनाने की जरूरत होगी।

भारत में मिसाइल रक्षा प्रणाली में लंबीऔर छोटी दूरी, दोनों तरह के इंटरसेप्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि भारत शॉर्ट-रेंज इंटरसेप्टर मिसाइलों को विकसित करने के मामले में बेहतर स्थिति में है। लॉन्ग रेंज सिस्टम के लिए और टेस्ट करने पड़ेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि मोदी सरकार का मानना है कि भारत के पास-पड़ोस में परमाणु हथियारों की जैसी होड़ मची हुई है, उसे देखते हुए मिसाइल डिफेंस सिस्टम के मामले में पीछे छूटना एक बड़ा सिक्योरिटी गैप होगा। भारत ने किसी भी देश के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल पहले न करने की जो नीति अपनाई है, उसे देखते हुए भी मिसाइल शील्ड की अहमियत ज्यादा है। पाकिस्तान इस नीति को नहीं मानता है।

सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने जिस बड़ी परियोजना को मंजूरी दी थी, वह डीआरडीओ में एक अरब डॉलर की लागत से ऐसी फैसिलिटी की स्थापना का था, जिससे बेहद जरूरी सीकर सिस्टम्स की मैन्युफैक्चरिंग की जा सके। मिसाइलों से जब निशाना साधा जाता है, तो टारगेटिंग के फाइनल फेज में सीकर सिस्टम्स से ही मिसाइलों की दिशा तय की जाती है। इस कारखाने के हैदराबाद के पास बनाए जाने की संभावना है।

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