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रामेश्वरम पहुंचा 'मिसाइलमैन' अब्दुल कलाम का पार्थिव शरीर

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 27, 2015 11:55 pm IST,  Updated : Jul 29, 2015 02:17 pm IST

नई दिल्ली: देश के पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के पार्थिव शरीर को यहां से आज एक विशेष विमान के जरिए उनके गृहनगर रामेश्वरम लाया गया। दिल्ली में पूर्व राष्ट्रपति को सभी तीनों

kalamपांचवीं कक्षा के अध्यापक बने एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में पढ़ने की वजह

डॉ कलाम अपने ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने की वजह अपने कक्षा 5 के अध्यापक सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताया करते थे। उनके अनुसार- एक बार अध्यापक ने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है, पर कोई भी छात्र जवाब नहीं दे सका, तो शिक्षक महोदय अगले ही दिन सभी विद्यार्थियों को समुद्र के किनारे ले गए औऱ वहां यह समझाया कि पक्षियों के शरीर की बनावट क्या होती है औऱ उनके उड़ सकने के पीछे क्या वजह होती है। इसी घटना ने मुझे अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। इसके बाद ही मैंने फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की।’

1962 में इसरो पहुंचे डॉ कलाम-

डॉ कलाम ने 1962 इसरो ज्वाइन किया औऱ जब भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया, तो वही प्रोजेक्ट डायरेक्टर थे। फिर सन 1980 में उन्हीं के नेतृत्व में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया तथा इसके साथ ही भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसके बाद डॉ कलाम ने स्वदेशी गाइडेड मिसाइल पर काम शुरू किया औऱ अग्नि व पृथ्वी जैसी मिसाइलें बनाईं।

पोखरण विस्फोट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई-

सन 1992 से 1999 के बीच वह रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार रहे औऱ इसी दौरान भारत ने पोखरण में दूसरी बार परमाणु विस्फोट किया।

डॉ कलाम को भारत सरकार ने 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया।

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