नई दिल्ली: आपने फिल्म थ्री इडियट तो देखी ही होगी, जिसमें बच्चों को अपने द्वारा थोपे गए करियर को चुनने वाले आईसीई के डीन वीरू सहस्त्रबुद्धे और अपने मन के मुताबिक काम और करियर चुनने वाले मस्तमौला रनछोड़ दास चांचड़ के बीच की तकरार को दिखाते हुए हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर चोट करने का प्रयास किया गया था।
इस फिल्म के बाद शायद कई मां-बापों ने अपने बच्चों को उनके मन मुताबिक करियर चुनने की आजादी दी होगी, लेकिन आज भी कुछ ऐसे मां-बाप मौजूद हैं जो अपने बच्चों को वही करने को कहते हैं जैसा उनका मन कहता है और इसी पशोपेश में कुछ बच्चे भारी दबाव के बीच आत्महत्या के विकल्प को चुन लेते हैं।
कुल्लू की रहने वाली दीक्षा नाम की एक लड़की ने सतलुज नदी में पुल से सिर्फ इसलिए छलांग लगा दी क्योंकि उसके मां-बाप उस पर लगातार एमबीबीएस क्वालीफाई करने का दबाव बना रहे थे, जबकि वो काफी कोशिशों के बावजूद इंट्रेंस एक्जाम क्वालीफाई नहीं कर पा रही थी। आपको बता दें कि छात्रा बीएमएस की पढ़ाई कर रही थी। वह बिलासपुर में अपने मित्र के यहां जाने का कहकर घर से निकली थी, लेकिन सतलुज नदी के पुल के पास पहुंचते ही उसने छलांग लगा दी। यह घटना 16 जून की है।