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यहां रावण का वध होता है, लेकिन जलाया नहीं जाता, जानिए क्यों

 Written By: India TV News Desk
 Published : Oct 23, 2015 11:55 am IST,  Updated : Oct 23, 2015 12:16 pm IST

नई दिल्ली: बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न में जहां देशभर में रावण का पुतला जलाया जाता है वहीं, राजस्थान के सीकर जिले के बाय गांव में अनोखी रीत है। यहां अनूठा दशहरा मनाया

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यहां रावण का वध होता है, लेकिन जलाया नहीं जाता

नई दिल्ली: बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न में जहां देशभर में रावण का पुतला जलाया जाता है वहीं, राजस्थान के सीकर जिले के बाय गांव में अनोखी रीत है। यहां अनूठा दशहरा मनाया जाता है। यहा रावण का वध तो होता है लेकिन पुतला नहीं जलाया जाता।

अनूठी है सीकर की रामलीला

सीकर जिले के खाटूश्यामजी के पास पिछले 165 साल से सजीव विजयादशमी मनाई जाती है। यह महोत्सव दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। यहां की रामलीला अनूठी इसलिए है क्योंकि यहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। युद्ध के बाद भगवान श्री राम का विजयजुलूस निकाला जाता है और इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है।

165 साल पुराना है रामलीला का इतिहास

यहां 165 साल से रामलीला का मंचन हो रहा है। रामलीला में 24 अवतारों की झांकियों का चित्रण होता है। स्थानिय लोग ही रामलीला में पात्र बनते है। 10 हजार लोगों की भीड़ जुटती है। रामलीला के मंचन के दौरान संवाद नहीं होते, बल्कि कलाकार मंच से की जा रही कमेंटरी पर अभिनय करते है। 18 घंटे तक चलने वाली इस रामलीला में 250 सैनिकों के बीच युद्ध होता है। रातभर रामलीला चलती है और सुबह सूर्य भगवान की पूजा के बाद समारोह का समापन होता है।

अगले पेज पर पढ़िए क्यों मनाया जाता है रावण की मौत का मातम

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