नई दिल्ली: जेएनयू विवाद के मद्देनजर देश में छात्र राजनीति पर चल रही बहस के बीच जामिया मिलिया इस्लामिया के विद्यार्थी छात्र संघ को बहाल करने की अपनी मांग के लिए अब भी संघर्ष कर रहे हैं जिसे नौ साल पहले भंग कर दिया गया था। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी पर लटकाये जाने के खिलाफ एक आयोजन को लेकर कथित देशद्रोह के मामले का सामना कर रहे जेएनयू के छह छात्रों के मामले में जामिया के छात्रों ने विश्वविद्यालय का समर्थन किया है।
जामिया के एक छात्र ने नाम नहीं जाहिर होने की शर्त पर कहा, जामिया के छात्रों के तौर पर हम केवल व्यक्तिगत आधार पर दूसरों की मदद करते हैं और विश्वविद्यालय के छात्रों के रूप में सामूहिक तौर पर नहीं। हास्यास्पद है कि विश्वविद्यालय को छात्र राजनीति अकादमिक कामकाज में हस्तक्षेप करने वाली गतिविधि लगती है। हम किसी भी विरोध प्रदर्शन के अधिकारविहीन सहभागी बने हुए हैं। एक और छात्र ने कहा, डीयू और जेएनयू में छात्रसंघों के उदाहरण हैं। पूरा देश बोलने की आजादी की बात कर रहा है और यहां हमारे साथ स्कूल के प्राचार्य जैसा बर्ताव किया जा रहा है जहां कोई मांग उठाने या सक्रिय रहने की कोई गुंजाइश नहीं है।